Japanese encephalitis in Madhya Pradesh: मध्य प्रदेश में जापानी इंसेफेलाइटिस (दिमागी बुखार) के मामले सामने आने के बाद हेल्थ डिपार्टमेंट अलर्ट पर है। मिली जानकारी के अनुसार, राज्य की राजधानी भोपाल (Bhopal) में 27 और इंदौर में 2 मामले सामने आए। इसके अलावा सागर और नर्मदापुरम में भी दिमागी बुखार के केसेस सामने आए हैं। इन मामलों को रोकने के लिए स्वास्थ्य विभाग टीकाकरण अभियान चलाने जा रहा है।
मध्य प्रदेश राज्य के स्वास्थ्य विभाग के संचालक (टीकाकरण) डॉ. संतोष शुक्ला द्वारा दी गयी जानकारी के अनुसार, इन चारों जिलों से दिमागी बुखार के मरीजों का पता चला है। विभाग द्वारा टीकाकरण कार्यक्रम की शुरूआत कर दी गयी है। जापानी बुखार से बचने के लिए जरूरी है कि-
लोग अपने आसपास साफ-सफाई का पूरा ध्यान रखें।
अपने आसपास मच्छरों को पनपने से रोकें।
दिमागी बुखार से बचाव का सबसे अच्छा तरीका वैक्सीनेशन है इसीलिए एक साल से 15 वर्ष तक की उम्र के बच्चों को वैक्सीन जरूर लगावाएं।
बरसात के मौसम में जब मच्छरों के पनपने की संभावना अधिक होती है तब विशेष सावधानी बरतें।
घर के आसपास पानी जमा ना होने दें। कूलर, गमले और घर में पड़ी खाली बाल्टियों आदि में पानी जमा ना होने दें।
पूरी बांह के कपड़े पहनें ।
मच्छरदानी में ही सोएं।
हेल्दी और बैलेंस्ड डाइट लें।
बुखार, सिरदर्द और कंपकंपी जैसे लक्षण दिखायी देने पर डॉक्टर से सम्पर्क करें।
कैसे फैलता है जापानी बुखार?
जापानी इंसेफेलाइटिस मच्छरों के काटने से फैलनेवाली बीमारी है। फ्लेविवायरस से संक्रमित मच्छरों के काटने से जापानी बुखार हो सकता है। हालांकि, यह बुखार संक्रामक नहीं होता इसलिए एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक नहीं फैलता। आमतौर पर मच्छर काटने के 5 से 15 दिनों बाद जापानी बुखार के लक्षण दिखायी देते हैं।
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