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Written By: Mousumi Dutta | Published : July 30, 2014 4:43 PM IST
गर्मी के मौसम के बाद हम दिल से मानसून का स्वागत करते हैं। लेकिन इसके आने के साथ सर्दी, फ़्लू, वायरल बुख़ार, जैसी बिमारियों की संभावना भी बढ़ जाती है। मानसून गर्म और ठंडे दिनों का संयोजन होता है। इस मौसम में आद्रता उच्च होने के कारण आँत या पाचन तंत्र कमज़ोर हो जाता है, जिसके कारण स्वास्थ्य संबंधी कई समस्याएं उठ खड़ी होती हैं, जैसे- पेट दर्द, बदहजमी, पेट में गैस की तकलीफ, पेचिश ,हैजा, आदि। गंदी जगहों में जीवाणु और रोगाणु फैलते हैं जिसके कारण इन बिमारियों के प्रसार में वृद्धि होती है। मानसून की इन बिमारियों से स्वास्थ्यवर्द्धक और संतुलित खाना खाकर लड़े और मौसम का मज़ा लूटें। ध्यान देने योग्य कुछ टिप्स:
खाने के पहले फलों और सब्ज़ियों को धो लें
फल या फूलगोभी और हरी पत्तेदार जैसी सब्ज़ियों में बहुत गंदगी होती है जो जीवाणुओं के मूल स्रोत होते हैं। इसलिए इनको खाने या पकाने से पहले गर्म पानी से धो लेना चाहिए या हल्का उबाल लेना चाहिए। ब्लैन्चिंग खाना पकाने की वह प्रक्रिया है जिसमें फल और सब्जि़यों को पहले एक या दो मिनट तक उबाला जाता है फिर बर्फ के पानी में या बहते ठंडे पानी के नीचे रखा जाता है। इससे गंदगी के साथ-साथ जीवाणु भी निकल जाते हैं और खाद्द पदार्थों को नष्ट होने से भी बचाया जा सकता है।
उच्च वसा वाले और मीठे खाद्द पदार्थ से बचें
मानसून के दौरान तला हुआ खाना खाना सबको अच्छा लगता है, जैसे समोसे या पकौड़े आदि। लेकिन इस मौसम में पाचन तंत्र कमज़ोर और सुस्त होता है जिसके कारण उच्च वसा वाले और मीठे खाद्द पदार्थों को हजम करना मुश्किल होता है। हजम धीरे-धीरे होने के कारण बदहजमी हो जाती है और पेट में ऐंठन होने लगती है। मानसून के दौरान भुना या भाप में पकाया और सेंका हुआ खाना खाना चाहिए।
दूध के ग्रहण की मात्रा को कम कर दें
वैसे तो दूध कैल्सियम और प्रोटीन का अच्छा स्रोत होता है और इसको संपूर्ण भोजन माना जाता है लेकिन तब भी मानसून के दौरान इसको ज़्यादा मात्रा में पीने से मना किया जाता है। दूध में जीवाणु भरपूर मात्रा में रहते हैं जिसके कारण संक्रमण फैलने की संभावना बढ़ जाती है। आप दूध की जगह पर दही खा सकते हैं।
हर्बल चाय पीयें
हर्बल चाय प्रतिरक्षी तंत्र की क्षमता को बढ़ाने का सबसे अच्छा उपाय है और सर्दी, बुख़ार और सर दर्द जैसे इनफेक्शन से भी यह लड़ती है। हर्बल चाय में तुलसी के पत्ते, दालचीनी, इलायची, सौंफ, और अदरक होता है। कॉफी, चाय, सोडा की जगह पर हर्बल चाय पीयें। कॉफी और चाय से पानी की कमी होती है इसलिए मानसून के समय इसका सेवन करने से बचें।
कच्चा खाद्द खाने से बचें
रोगाणु और जीवाणु का मूल स्रोत कच्चा खाना होता है।कच्चे फल और सब्जियों को सलाद या रायता के रूप में न खायें। सेब और नाशपाती जैसे फलों को खौलते पानी में पका लेना चाहिए। सलाद और अंकुर को भी उबाल लेना चाहिए।
ज़्यादा मात्रा में जल पीयें
मानसून के समय, आँत की समस्या बढ़ जाती है। अधिक मात्रा में जल पीने से टॉक्सिन्स शरीर से निकल जाते हैं और पाचन तंत्र साफ हो जाता है। दूषित जल से संक्रमण सबसे ज़्यादा फैलता है इसलिए हमेशा जल को उबालकर पीना चाहिए। जल को उबालने से क्षतिकारक जीवाणु/सूक्ष्म जीव मर जाते हैं।
चित्र स्रोत: Getty Images
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