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Written By: Pallavi Kumari | Updated : May 27, 2022 9:37 AM IST
Monkeypox virus: मंकीपॉक्स वायरस अब लगभग 20 देशों में फैल चुका है और इसे लेकर तमाम हेल्थ एजेंसी चिंता में है। वहीं, इस वायरस को लेकर शोधकर्ता कुछ शोध कर रहे हैं और पता लगाने की कोशिश में है कि आखिरकार इस वायरस का इलाज क्या है और टेस्टिंग के जरिए इसका आसानी से कैसे पताया जा सकता है। इसी कड़ी में लैंसट जर्नल में एक रिपोर्ट छपी है कि मंकीपॉक्स वायरस का पता ब्लड टेस्ट और गले के स्वैब टेस्ट (Monkeypox virus can be detected by blood and throat) के जरिए लगाया जा सकता है। इसके अलावा भी ये रिपोर्ट मंकीपॉक्स वायरस को पता लगाने के बारे में बहुत कुछ कहता है। आइए जानते हैं इस शोध के बारे में विस्तार से।
द लैंसेट (Lancet study) की रिपोर्टबताती है कि खून और गले के स्वैब के जरिए मंकीपॉक्स वायरस का पता लगाया जा सकता है। इसके अलावा अध्ययन में दावा किया गया कि मंकीपॉक्स वायरस पर कुछ एंटीवायरल दवाएं काम कर सकती हैं। द लैंसेट इंफेक्शियस डिजीज जर्नल में मंगलवार को प्रकाशित अध्ययन में विश्लेषण किए गए मामले में बताया गया है कि अफ्रीका के बाहर अस्पताल में इस बीमारी का ट्रांसमिशन देखा गया है और इस पर शोध किया गया। शोध ने बीमारी के इलाज के लिए दो अलग-अलग एंटीवायरल दवाओं ब्रिनसीडोफोविर (brincidofovir) और टेकोविरिमैट (tecovirimat) के पहले ऑफ-लेबल उपयोग के लिए रोगी की प्रतिक्रिया की भी सूचना दी।
इसके अलावा इस शोध में बताया गया है कि बीमारी के लिए संक्रमण नियंत्रण और उपचार रणनीतियां अभी तक तय नहीं हुई हैं, अध्ययन के डेटा बीमारी की नैदानिक विशेषताओं के साथ-साथ संचरण की गतिशीलता को और समझने के वैश्विक प्रयासों को सूचित करने में मदद कर सकते हैं। जैसा कि सार्वजनिक स्वास्थ्य अधिकारी यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि यूरोप और उत्तरी अमेरिका में मई 2022 के मंकीपॉक्सके प्रकोप का कारण क्या है जिसने कई रोगियों को प्रभावित किया है जिन्होंने न तो यात्रा की और न ही पहले से ज्ञात मामले के लिए एक पहचाने गए लिंक की सूचना दी है। इसे लेकर शोधकर्ता कहते हैं कि हमारा अध्ययन मनुष्यों में मंकीपॉक्स के इलाज को ढंढने की कोशिश पर है।
इसके अलावा शोध में यह भी बताया दुनिया भर के सार्वजनिक स्वास्थ्य अधिकारियों और स्वास्थ्य कर्मियों को मंकीपॉक्स के नए मामलों की संभावना के प्रति सतर्क रहना चाहिए। साथ ही आगे अगर इसका प्रकार अन्य देशों में होता है तो ये गंभीर और चिंताजनक स्थिति उत्पन्न कर सकती है।