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Written By: Pallavi Kumari | Updated : August 6, 2022 11:41 AM IST
भारत में मंकीपॉक्स को लेकर स्थिति दिन पर दिन चिंताजनक हो रही है। जहां पहले यहां मंकीपॉक्स आने के बारे में सोचा भी नहीं जा रहा था, वहां अब तक मंकीपॉक्स के कुल 9 मामले (monkeypox cases in india) सामने आ चुके हैं। 5 मामले केरल से हैं तो, 4 दिल्ली से। वहीं, अब खबर गुजरात से आ रही है कि वहां मंकीपॉक्स का पहला संदिग्ध मामला सामने आया है। इसी तरह केरल और कर्नाटक में भी मंकीपॉक्स के कई संदिग्ध मामले हैं। इस तमाम स्थितियों को देखते हुए केंद्र सरकार ने आज एक्सपर्ट्स और मंत्रियों के साथ एक हाई लेवल मीटिंग बुलाई है। तो, आइए जानते हैं तमाम मंकीपॉक्स से जुड़े सभी अपडेट्स के बारे में विस्तार से।
गुजरात में मंकीपॉक्स का संदिग्ध मामला सामने आया है। इस व्यक्ति में मंकीपॉक्स के कई लक्षण देखे गए हैं। इसलिए इस व्यक्ति के खून को जांच के लिए भेज दिया गया है। गौर करने वाली बात ये है कि उनका किसी यात्रा का इतिहास नहीं है और फिर भी मंकीपॉक्स के लक्षण हैं। गुजरात में मंकीपॉक्स का अभी तक कोई भी मामला समाने नहीं है। ऐसे में मंकीपॉक्स को लेकर ये संदिग्ध मामला राज्य में टेंशन बढ़ा रहा है।
केंद्र सरकार ने मंकीपॉक्स के बढ़ते मामलों को देखते हुए हाई लेवल मीटिंग बुलाई है। इस मिटिंग में इमरजेंसी मेडिकल रिलीफ (EMR) के डायरेक्टर एल. स्वास्थीचरण, एम्स (AIIMS), लेडी हार्डिंग (lady Hardinge), राम मनोहर लोहिया अस्पताल (RML) के एक्सपर्ट डॉक्टर और नेशल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी के लोग शामिल होंगे। इस मीटिंग में भारत में इस वायरस के प्रकोप और तैयारियों पर बातचीत होगी।
भारत के प्रसिद्ध वायरोलॉजिस्ट और वैक्सीन विशेषज्ञ डॉ. गगनदीप कांग (Dr. Gagandeep Kang) की मानें तो, आम लोगों को मंकीपॉक्स के संक्रमण के बारे में चिंता करने की जरुरत नहीं है। वेल्लोर के क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज में माइक्रोबायोलॉजी के प्रोफेसर डॉ कांग ने कहा है कि भले ही इस वायरस के कारण लोगों की मौत हुई है लेकिन अभी भी हमें इसे गहराई से समझने की जरूरत है। इस समय यौन नेटवर्क के आसपास मंकीपॉक्स फैलने का एक पैटर्न है, हालांकि मंकीपॉक्स त्वचा से संपर्क के कारण अधिक फैलता है।अब पैटर्न को देखते हुए, हमें रोगियों के ज्ञात यौन संपर्कों का पता लगाने की स्पष्ट आवश्यकता है। पर इस बीच हमें घबराने की जरूरत नहीं है क्योंकि अभी ये इसकी शुरुआत है, ये कोरोना से बिलकुल अलग है और इसकी वैक्सीन बनान भी कोरोना की वैक्सीन बनाने से अलग और मुश्किल हो सकता है।
एम्स दिल्ली ने मंकीपॉक्स वायरस का पता लगाने के लिए एकत्र किए गए नमूनों की टेस्टिंग शुरू कर दी है। ये यहां के माइक्रोबायोलॉजी विभाग में होगी। बता दें कि माइक्रोबायोलॉजी विभाग के तहत एम्स वायरोलॉजी लैब देश भर में ICMR द्वारा परीक्षण के लिए अधिकृत 15 प्रयोगशालाओं में से एक है।
आईसीएमआर-एनआईवी (ICMR-NIV) के एक अध्ययन में कहा गया है कि भारतीय वैज्ञानिकों की एक टीम ने पाया है कि देश में फैल रहे मंकीपॉक्स वायरस स्ट्रेन यूरोप के मंकीपॉक्स वाले स्ट्रेन से अलग है, जिससे ये बीमारी बड़ी नजर आ रही है। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च-नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (ICMR-NIV), पुणे की टीम ने केरल से मंकीपॉक्स के दो मामलों की जेनेटिक सीक्वेंसिंग की है।
डेटा से पता चला कि देश में मौजूद वायरस स्ट्रेन A.2 है। यह पहले थाईलैंड और अमेरिका में मौजूद था। हालांकि, यूरोप में सुपरस्प्रेडर घटनाओं का कारण बनने वाला स्ट्रेन B.1 है।