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Written By: Jitendra Gupta | Published : May 23, 2022 2:39 PM IST
भारत में फिलहाल मंकीपॉक्स नहीं लेकिन 80 करोड़ लोगों को खतरा, वजह जान उड़ जाएंगे होश
Monkeypox symptoms : दुनियाभर के अलग-अलग देशों में 'मंकीपॉक्स' के मामले सामने आ रहे हैं, जिसे मद्देनजर डब्लूएचओ पहले ही अलर्ट जारी कर चुका है। वहीं भारत में केंद्र सरकार के प्रमुख स्वास्थ्य संस्थान जैसे नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल (NCDC)और इंडियन काउंसिल फॉर मेडिकल रिसर्च भी हालात पर नजर बनाए हुए हैं। इसके साथ ही देशभर के हवाईअड्डों पर प्रभावित देशों से आने वाले ऐसे यात्री, जिनमें लक्षण दिखाई दे रहे हैं उन्हें लेकर सतर्क रहने को कहा गया है। वहीं स्वास्थ्य विशेषज्ञ इस बात को लेकर चिंतित हैं कि उनका स्टाफ मंकीपॉक्स से होने वाले रैशेज का पता लगाने में सक्षम नहीं है।
डब्लूएचओ-टीडीआर में एडवाइजर और यूनिवर्सिटी ऑफ वॉशिंगटन में ग्लोबल हेल्थ के प्रोफेसर डॉ. सुभाष हीरा का कहना है कि हालांकि अभी तक भारत में मंकीपॉक्स का एक भी मामला सामने नहीं आया है लेकिन देश में भारी संख्या में रोजाना अफ्रीका और यूरोप से अंतर्राष्ट्रीय यात्री लौट रहे हैं और हवाईअड्डों का स्टाफ ऐसे यात्रियों के शरीर पर दिखाई देने वाले मंकीपॉक्स के रैशेज को सिर्फ शारिरिक जांच के माध्यम से पता लगाने में समर्थ नहीं है।
डॉ. हीरा का कहना है कि मैंने 1980 और 90 के दशक में मध्य अफ्रीका स्थित यूनिवर्सिटी टीचिंग हॉस्पिटल में काम करते हुए सैंकड़ों मंकपॉक्स के मामलों का निदान और उपचार किया था। इस तरह के मामले ज्यादातर गर्म-आद्र मौसम के दौरान सामने आते हैं और इनमें बहुत कम ही अस्पताल में भर्ती होने की नौबत आती है। ऐसा इसलिए क्योंकि लोग पहले से ही स्मॉलपॉक्स वायरस की वैक्सीन ले चुके होते हैं।
बता दें कि स्मॉलपॉक्स वैक्सीन का वैश्विक अभियान 1980 में ही समाप्त हो गया था। लेकिन अचानक से यूरोप में मंकीपॉक्स वायरस सामने आ गया, जिसने दुनियाभर में 40 साल से कम उम्र के लोगों के लिए एक खतरे की बंजी दी, खासकर उन लोगों के लिए जिन्होंने स्मॉलपॉक्स की वैक्सीन नहीं ली थी। उन्होंने कहा की जहां तक बात जन स्वास्थ्य की है तो मैं 1980 से 90 के दशक के दौरान मंकीपॉक्स रैशेज की कुछ तस्वीरें शेयर कर रहा हूं, जो मेरे निजी तौर पर ली गई थीं।
उन्होंने कहा कि भारत में 80 करोड़ लोग 40 से कम उम्र के ऐसे हैं, जिन्हें स्मॉलपॉक्स का टीका नहीं लगा है और ये लोग इस वायरस के प्रति संवेदनशील हैं। अगर ये लोग सावधानी और एहतियात नहीं बरतते हैं तो इन्हें खतरा जरूर हो सकता है।
मंकीपॉक्स के लक्षण
1-सिरदर्द
2-मांसपेशियों में दर्द
3-लिंफ नोड में सूजन
मंकीपॉक्स से संक्रमित होने पर अगले 3 से 4 दिन में रैशेज दिखाई देने लगते हैं और देखते ही देखते पूरे शरीर में फैल जाते हैं फिर चाहे वो चेहरा हो या फिर हाथ-पैर। डीवाई पाटिल मेडिकल कॉलेज में सर्जरी के प्रोफेसर डॉ. केतन वाघलोकर का कहना है कि ये घाव विभिन्न चरणों जैसे मैक्यूल्स, पैपुल्स, वेसिकल्स, पस्ट्यूल्स के माध्यम से फैलते हैं और अंत में पपड़ी के रूप में दिखाई देने लगते हैं। ये बीमारी 2 से 4 सप्ताह तक चलती है।