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Monkeypox virus: 19 देशों में फैला मंकीपॉक्स, पर एक्सपर्ट का कहना- 'भारत को डरने की जरुरत नहीं'

Monkeypox India: मंकीपॉक्सवायरस चेचक (smallpox) से मिलता-जुलता है। ऐसे में एक्सपर्ट चेचक की वैक्सीन (Smallpox vaccine) को इससे बचाव के रूप में देख रहे हैं।

Monkeypox outbreak: विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की मानें तो मंकापॉक्स अब तक 19 देशों में फैल चुका है। जिसमें कि मंकीपॉक्स के 131 मामलों की पुष्टी हो चुकी है और 106 संदिग्ध मामले सामने आए हैं। विशेषज्ञ इस घटना को पूरी तरह से समझ नहीं पा रहे हैं कि ये किस तरह से फैल सकता है या किस तरह से फैल रहा है। दरअसल, स्पेन और बेल्जियम में हाल की लहरों में यौन गतिविधि से शुरू हुआ था, लेकिन ये 19 देशों में पहुंच चुका है। सुकूनदेह बात ये है कि भारत में अभी तक इसके एक भी मामले सामने नहीं आए हैं और एक्सपर्ट का कहना है कि आगे चल कर इसके भारत में फैलने की संभावना भी कम है।

एक्सपर्ट का कहना- 'भारत को डरने की जरुरत नहीं'

बता दें कि मंकीपॉक्स वायरसको लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कई बातें बताई है लेकिन अभी तक इसे लेकर कई संभावनाएं जताई हैं लेकिन भारत में इसे लेकर पॉजिटिव माहौल है। दरअसल,भारतीय एक्सपर्ट्स की मानें तो डॉक्टरों और विशेषज्ञों का मानना ​​है कि क्योंकि मंकीपॉक्स वायरस चेचक वाले वायरस जैसा है, इसलिए चेचक का टीका लोगों को मंकीपॉक्स होने से बचा सकता है। अफ्रीका के पिछले आंकड़ों से पता चलता है कि चेचक का टीका मंकीपॉक्स को रोकने में कम से कम 85 प्रतिशत प्रभावी है।

क्या मंकीपॉक्स के खिलाफ चेचत का टीका (Smallpox vaccine) प्रभावी है?

CDC के अनुसार, मंकीपॉक्स वायरस चेचक का कारण बनने वाले वायरस से निकटता से संबंधित है, इसलिए चेचक का टीका लोगों को मंकीपॉक्स होने से बचा सकता है। साथ ही मंकीपॉक्स के लक्षण भी चेचक से मिलते-जुलते नजर आते हैं। जैसे कि बुखार, मांसपेशियों में दर्द और सिरदर्द आदि। इसके अलावा कुछ एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह चेचक की तुलना में कम घातक है, लेकिन विशेषज्ञ अफ्रीका से परे इस बीमारी के असामान्य प्रसार के बारे में चिंतित हैं जहां यह आमतौर पर फैलता है। हालांकि, मंकीपॉक्स और चेचक के बीच मुख्य अंतर यह है कि फ्लू जैसे लक्षणों के अलावा, मंकीपॉक्स शरीर में लिम्फ नोड्स या ग्रंथियों के बढ़ने का कारण बनता है।

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इसलिए डॉक्टरों द्वारा चेचक के टीके को मंकीपॉक्स के खिलाफ एक शक्तिशाली उपकरण के रूप में सराहा जाने के बाद, ऐसी चर्चा है कि भारत में जहां ज्यादातर लोगों और बच्चों को चेचक का टीका लगा है तो इसे फैलने की संभावना बेहद कम है। हालांकि वायरस के प्रभाव और इसके संभावित प्रसार का आकलन करना जल्दबाजी होगी, लेकिन केंद्र और राज्य इस बात पर कड़ी निगरानी रख रहे हैं कि मामले शून्य रहें।

हालांकि, अभी भी मंकीपॉक्स महामारी के बारे में बात करना जल्दबाजी होगी, हाल ही में रिपोर्ट किए गए मामलों में ये तेजी से फैल रहा है और लोगों को अपना शिकार बना रहा है। तो, अच्छा यही होगा कि हम इसे लेकर सतर्क रहें और इससे जुड़ी हर छोटी-बड़ी घटनाओं पर नजर रखें।

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