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कोरोना वायरस के बाद मंकीपॉक्स वायरस दुनियाभर के देशों में तेजी से फैल रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की मानें तो, अब तक दुनियाभर के लगभग 80 देशों में ये महामारी फैल चुकी है और करीब 20 हजार लोग अब तक इसके शिकार हो चुके हैं। इसी को देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organization) ने इस वायरस को अब ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी (Monkeypox officially becomes a global health emergency) घोषित कर दिया है। डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक टेड्रोस एडनॉम घेब्येयियस ने कहा कि तेजी से फैल रहा मंकीपॉक्स का प्रकोप वैश्विक स्वास्थ्य के लिए आपातकाल की स्थिति बनता जा रहा है, इसलिए डब्ल्यूएचओ (WHO) इसे ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी घोषित करता है और इसे लेकर अलर्ट जारी करता है।
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डब्ल्यूएचओ (WHO) के महानिदेशक टेड्रोस एडनॉम घेब्येयियस (General Tedros Adhanom Ghebreyesus) ने बताया कि ये वायरल इतनी तेजी से फैल रहा है कि ये अंतर्राष्ट्रीय चिंता का कारण बन गया है। आगे चल तक ये चिंताजनक स्थितियों में बदल सकता है। हमें एक अंतर्राष्ट्रीय प्रतिक्रिया की आवश्यकता है और टीकों और उपचारों को साझा करने में सहयोग करने के लिए धन और वैश्विक प्रयासों की जरूरत है।
बता दें कि ये फैसला तब आया है जब दुनियाभर के बड़े देशों में मंकीपॉक्सपहुंच गया है। जिनेवा में एक मीडिया ब्रीफिंग के दौरान स्वास्थ्य आपातकाल की घोषणा करने के अपने फैसले की घोषणा करते हुए, टेड्रोस ने पुष्टि की कि समिति एक आम सहमति तक पहुंचने में विफल रही, जिसमें नौ सदस्य घोषणा के पक्ष में और छह इसके विपक्ष में थे। पहले, टेड्रोस ने आम तौर पर विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों का समर्थन किया है, लेकिन सूत्रों ने कहा कि उन्होंने बहुमत की राय की कमी के बावजूद, मंकीपॉक्स के मामले बढ़ने और टीकों और उपचारों की आपूर्ति के बारे में चिंताओं के कारण अलर्ट को वापस लेने का फैसला किया था।
मंकीपॉक्स वायरस जून महीने से जुलाई तक में 80% से ज्यादा फैल गया है। ऐसे में इस बीमारी के सबसे ज्यादा मामले यूरोप में हैं जहां कुल संक्रमण के 80% मामले हैं। इसके अलावा यूएस में भी इसके मामले सामने आए हैं। लेकिन चिंता की बात ये है कि भारत में अब तक इसके 3 मामलों की पुष्टि हो चुकी है। तीनों मामले केरल के हैं। बता दें कि दुनियाभर के 80 देशों से अब तक 17,092 मंकीपॉक्स के मरीजों की पुष्टि हो चुकी है। साथ ही इस बीमारी से 5 लोगों की मौत हुई है। ऐसे में डब्ल्यूएचओ (WHO) का ये फैसला तमाम स्वास्थ्य विभागों और समितियों के लिए सतर्क रहने का अलार्म है।