... Read More
By clicking “Accept All Cookies”, you agree to the storing of cookies on your device to enhance site navigation, analyze site usage, and assist in our marketing efforts. Cookie Policy.
Written By: Jitendra Gupta | Published : June 26, 2022 10:12 AM IST
मंकीपॉक्स फिलहाल के लिए 'ग्लोबल इमरजेंसी' नहीं! समिति में मतभेदों के बाद WHO का फैसला
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) ने मंकीपॉक्स को ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी करार दिए जाने की सभी अटकलों को सिर से नकार दिया है हालांकि संस्थान के निदेशक टेड्रोस अघानोम घेब्रेसियस का कहना है कि वह इस बीमारी के प्रकोप को लेकर गंभीर रूप से चिंतित हैं। टेड्रोस ने एक बयान में कहा कि मैं मंकीपॉक्स प्रकोप को लेकर बहुत ज्यादा चिंतित हूं। निश्चित रूप से ये एक स्वास्थ्य खतरे के रूप में सामने आया है, जिसकी वजह से मैं और मेरे डब्लूएचओ के सहयोगी इसपर बारीकी से नजर रखे हुए हैं।
वहीं डब्लूएचओ ने एक अलग बयान में कहा कि समीति के भीतर सदस्यों के विचार में मतभेद है लेकिन कुल-मिलाकर इस वक्त सभी की सहमति है कि ये प्रकोप कोई पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी ऑफ इंटरनेशनल कंसर्न (PHEIC) नहीं है।
बता दें कि 'ग्लोबल इमरजेंसी' सिर्फ और सिर्फ कोरोनावायरस महामारीऔर पोलियो को जड़ से खत्म करने के लिए ही तय किया गया है। डब्लूएचओ का ये फैसला अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञों की मीटिंग में मंकीपॉक्स पर सलाह-मशविरा किए जाने के बाद आया है।
डब्लूएचओ के मुताबिक, बीते 6 सप्ताह में 48 देशों में मंकीपॉक्स के 3200 से ज्यादा मामलों की पुष्टि हुई है और अभी तक इस वायरस से 1 व्यक्ति की मौत हुई है। मंकीपॉक्स उन देशों में फैला है, जहां ये आमतौर पर कभी नहीं फैला था। इस साल अभी तक मध्य अफ्रीका में करीब 1500 मामले सामने आए हैं और 70 लोगों की मौत मंकीपॉक्स से हो चुकी है। मध्य अफ्रीका में ये बीमारी बहुत ही आम है। डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो में मुख्य रूप से ये बीमारी फैली थी।
मंकीपॉक्स, एक प्रकार की वायरल बीमारी है, जिसमें व्यक्ति को फ्लू जैसे लक्षण और स्किन पर रैशेज दिखाई देते हैं। ये बीमारी ज्यादातर उन पुरुषों में फैलती है, जो दूसरे पुरुषों के साथ संबंध बनाते हैं। मंकीपॉक्स के लिए वैक्सीन और उपचार उपलब्ध है हालांकि इसकी पूर्ति बहुत ही सीमित है।
कुछ स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि डब्लूएचओ घोषणा को लेकर बहुत हड़बड़ी दिखा रहा है क्योंकि जनवरी 2020 में कोरोनावायरस को भी एक पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी करार दिया गया था, जिसने दुनिया को हिला कर रख दिया था। जबकि कुछ का कहना है कि मंकीपॉक्स इमरजेंसी के सभी मानदंडो को पूरा करता है।
येल यूनिवर्सिटी में महामारी विज्ञान के सहायक प्रोफेसर और समिति की सलाहकार ग्रेग गोन्जालवेज ने डब्लूएचओ के इस फैसले को रास्ते से भटका हुआ बताया है। उन्होंने कहा कि ये सभी मानदंड़ो को पूरा करता है लेकिन डब्लूएचओ ने इस ऐतिहासिक फैसले पर बाजी अपने हाथ में रखने का फैसाल किया है।