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अगर आप सोच रहे हैं कि मंकीपॉक्स सबसे ज्यादा आपकी स्किन को प्रभावित करता है तो आप बिल्कुल गलत हैं। क्वीन मैरी यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन के एकेडमिक फाउंडेशन डॉक्टर जेम्स ब्रुंटन बैडनोच ने इस बात का जिक्र किया है कि इस घातक वायरस की वजह से न्यूरोलॉजिक्ल और साइकेट्रिक समस्याएं भी होती है। बता दें कि अब तक मंकीपॉक्स में रैशेज और फ्लू जैसे लक्षणों के सामने आने की ही बात कही जा रही थी। जेम्स ने ये भी बताया कि स्मॉलपॉक्स वायरस से संबंधित वायरस और स्मॉलपॉक्स के लिए वैक्सीन लगवा चुके लोगों में न्यूरो जटिलताएं का इतिहास जुड़ा हुआ रहा है। इसलिए वैज्ञानिक चाहते हैं कि ये पता लगाया जाए कि क्या मंकीपॉक्स भी समान जटिलताएं पैदा कर सकता है।
वैज्ञानिकों ने मौजूदा मंकीपॉक्स महामारी से पहले मंकीपॉक्स इंफेक्शनके शिकार लोगों में न्यूरोलॉजिक्ल और साइकेट्रिक समस्याओं के सभी सबूतों को जांचा और इसके नतीजे जर्नल eClinicalMedicine में प्रकाशित हुए हैं।
उन्होंने कहा कि मंकीपॉक्स से संक्रमित 2 से 3 फीसदी लोगों की हालत बहुत ज्यादा बिगड़ गई और उनमें गंभीर न्यूरोलॉजिक्ल समस्याएं विकसित हुई, जिसमें मिर्गी के दौरे से लेकर दिमाग में सूजन की परेशानी भी शामिल है।
जेम्स ने कहा कि इस बात को जानना बहुत ही जरूरी है कि ये आंकड़े कुछ अध्ययन पर आधारित हैं, जिसमें कुछ लोग शामिल हुए थे। हालांकि इनमें गंभीर और दुर्लभ मस्तिष्क समस्याएं कम थी। उन्होंने कहा कि हमने मंकीपॉक्स से संक्रमित लोगों के एक बड़े समूह पर किए अध्ययन में कुछ सबूत पाएं। इन लोगों में न्यूरोलॉजिक्ल समस्याएं बहुत आम थीं, जिनमें सिरदर्द से लेकर मांसपेशियों में दर्द और थकान भी शामिल है।
जेम्स का कहना है कि अध्ययन को देखने से ये मालूम हुआ कि अभी तक ये स्पष्ट नहीं है कि ये लक्षण कितने गंभीर हो सकते हैं और कितने वक्त तक व्यक्ति को परेशान कर सकते हैं। इतना ही नहीं ये भी अभी तक स्पष्ट नहीं है कि मंकीपॉक्स से संक्रमित कितने लोगों में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं होती हैं जैसे एंग्जाइटी और डिप्रेशन। कुछ अध्ययन में इनपर जांच की जा रही है। कुछ अध्ययन में ये भी सामने आया है कि लो मूड भी बहुत से लोगों में देखा गया है।
उन्होंने कहा हालांकि हमने पाया है कि मंकीपॉक्स से संक्रमित लोगों में न्यूरोसाइकेट्रिक लक्षण हो सकते हैं। हमारे अध्ययन में ये कहना सही नहीं होगा कि ये वायरस इन समस्याओं का कारण हो सकता है। भविष्य में हमें इस बात पर शोध करने जरूरत होगी कि मंकीपॉक्स से संक्रमित होने से पहले लोगों में किसी प्रकार की न्यूरोसाइकियाट्रिक स्थिति थी या फिर नहीं।