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Written By: Atul Modi | Published : May 21, 2022 4:31 PM IST
विश्व स्वस्थ्य संगठन या WHO ने शुक्रवार को यूरोप में फैले मंकी पॉक्स आउट ब्रेक के बारे में चर्चा करने के लिए मीटिंग बुलाई। यह एक वायरल इंफेक्शन है जो सेंट्रल और पश्चिमी अफ्रीका में ज्यादा आम है। इसके यूरोप में 100 केस देखे जा चुके हैं। जर्मनी के मुताबिक यह यूरोप का सबसे बड़ा आउट ब्रेक है। इसके केस लगभग 9 देशो में देखे जा चुके हैं जिनमें बेल्जियम, फ्रांस, जर्मनी, इटली, स्पेन, नीदरलैंड्स, पुर्तगाल, स्वीडन, यूनाइटेड किंगडम, यूनाइटेड स्टेट्स, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया भी शामिल हैं।
स्पेन में शुक्रवार को 24 नए मामले मिले हैं खासकर मेड्रिड भाग में जहां सरकार ने बहुत सारी इंफेक्शन होने के कारण एक सौना को बंद कर दिया था। इजरायल में एक अस्पताल में 30 साल के व्यक्ति का इलाज चल रहा है जो लगातार इसी बीमारी से जुड़ी लक्षण दिखा रहा है। वह पश्चिमी यूरोप से आया था। पहले यह बंदरों में देखने को मिला था लेकिन यह बीमारी नजदीकी संपर्क में आने से फैल रही है और अफ्रीका के बाहर भी इसके बहुत से गंभीर मामले देखने को मिले हैं।
वैज्ञानिक इसे कोविड जैसा आउटब्रेक नहीं बता रहे हैं कि यह एक महामारी में परिवर्तित हो सके। यह कोरोना वायरस की तरह तेजी से नहीं फैल रहा है। यह एक वायरल और माइल्ड इन्फेक्शन है जिसमें बुखार और थोड़े बम्पी रैश लक्षण के रूप में दिखाई देते हैं। WHO की कमेटी ने स्ट्रेटेजिक टेक्निकल एडवाइजरी ग्रुप ऑन इन्फेक्टियस हजार्ड्स के साथ एक मीटिंग करी जिसमें इंफेक्शन के रिस्क को लेकर सलाह दी गई।
अभी यह नहीं बताया जा सकता कि इस आउट ब्रेक को पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी ऑफ इंटरनेशनल कंसर्न की उपाधि दी जाए या नहीं क्योंकि यह अलर्ट अभी केवल कोविड 19 को ही मिला है। इस समय सामान्य लोगों को इस वायरस से काफी कम रिस्क है। इस आउट ब्रेक को एक एपिडेमिक कहा जा सकता है। यह एपिडेमिक ज्यादा समय तक नहीं टिकने वाला है। इन केसों को ठीक करने के लिए दवाइयां मौजूद हैं और इन्हें आसानी से ट्रैक भी किया जा सकता है।
लेकिन अभी भी इसके ज्यादा फैलने को लेकर चिंता बनी है क्योंकि गर्मियों के मौसम में लोग पार्टी करने और त्यौहार मनाने के लिए एक दूसरे के साथ मिलते जुलते हैं और इकठ्ठे होते हैं।
इसके लिए कोई खास वैक्सिन नहीं है लेकिन स्मॉल पॉक्स को ठीक करने वाली वैक्सिन ही इसमें भी काम आ सकती है। 7 मई को इसका पहला केस देखने को मिला था और वह भी उस व्यक्ति का था जो नाइजीरिया से यूरोप वापिस लौटा था। अफ्रीका के अलावा भी अब दुनिया में इसके 100 केस ट्रैक किए जा चुके हैं।
1970 से ही इस वायरस के केस लगभग 11 अफ्रीकन देशों में देखने को मिले हैं। इस साल भी 46 केसों पर संदेह जताया जा रहा था जिसमें से 15 कन्फर्म हो चुके थे।