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Written By: Pallavi Kumari | Updated : May 24, 2022 11:53 AM IST
भारतीय स्वास्थ्य मंत्रायल ने मंकीपॉक्स वायरस को लेकर जहां हर राज्य को सचेत रहने को कहा है, वहीं अब हर राज्य अपने यहां इससे वायरस से बचाव के अलग-अलग तरीकों को अपना रही है। राजस्थान और महाराष्ट्र में इसे लेकर सख्त नियम लागू किए गए हैं वहीं, अब कोलकाता और तमिलनाडु में भी मंकीपॉक्स को लेकर खास एडवाइजरी जारी की गई है। मंकीपॉक्स वायरस (monkeypox disease) को लेकर कोलकाता और तमिलनाडु ने अपने यहां विदेश यात्रा करने वाले लोगों को लेकर सख्त एडवाइजरी जारी की है। बताया गया है कि जो लोग यूरोप, अफ्रीका और ब्रिटेन से यात्रा करके आ रहे हैं, उन्हें एयरपोर्ट पर ही रोका जाए और उनमें पहले लक्षणों की जांच की जाए और तब एंट्री मिले।
कोलकाता एयरपोर्ट पर यात्रियों में मंकीपॉक्स के लक्षणों को लेकर लुकआउट नोटिस जारी किया गया है। यहां, इमिग्रेंट ऑफिसर को आदेश दिया गया है कि यूरोप, अफ्रीका और ब्रिटेन और जिन भी देशों में मंकीपॉक्स के मामले हैं वहां के यात्रियों पर खास ध्यान दिया जाए। साथ ही अगर उनमें मंकीपॉक्स के लक्षण नजर आए तो उन्हें रोका जाए। जैसे कि
1. बुखार
2. चकत्ते
3. लिम्फ नोड्स में सूजन
4. हाथ और मुंह पर दाने
इतना ही नहीं ऐसे भी लक्षण वाले लोगों को खास हॉस्पिटल में भेजने की भी बात कही गई है। साथ ही बताया गया है कि जिन लोगों में लक्षण नहीं हैं और वे इन देशों से लौटे हैं उन्हें इस वायरस के बारे में बता कर सतर्क किया जाए और ताकि बाद में अगर कोई लक्षण नजर आते हैं तो वे तुरंत स्थानीय स्वास्थ्य डिपार्टमेंट स संपर्क करें।
तमिलनाडु सरकार ने सोमवार को जिला कलेक्टरों और निगम आयुक्तों को मंकीपॉक्स के संदिग्ध मामलोंकी निगरानी और पहचान करने और उचित उपचार के लिए उन्हें स्वास्थ्य सुविधाओं में अलग-थलग करने का निर्देश दिया। राज्य के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण के प्रमुख सचिव डॉ जे राधाकृष्णन ने अधिकारियों को इस वायरल जूनोटिक बीमारी पर लोगों में किसी भी लक्षण के लिए देखने के लिए कहा, जिन्होंने पिछले 21 दिनों में उस देश की यात्रा की है जिसने हाल ही में पुष्टि की है या संदिग्ध मामलों की पुष्टि की है। मंकीपॉक्स की निगरानी की जानी चाहिए।
तमिलनाडु सरकार का कहना है कि सभी संदिग्ध मामलों को स्वास्थ्य सुविधाओं में अलग किया जाना चाहिए और जिला निगरानी अधिकारी को सूचित किया जाना चाहिए। वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश जारी करते हुए उन्होंने कहा कि ऐसे रोगियों का इलाज करते समय संक्रमण नियंत्रण के सभी नियमों का पालन किया जाना चाहिए।
बता दें कि मंकीपॉक्स आमतौर पर दो से चार सप्ताह तक चलने वाले लक्षणों के साथ संक्रामक बीमारी है। इसलिए तमिलनाडु सरकार का यह कहना है कि लक्षण नजर आते ही रक्त और थूक जैसे तरल पदार्थ के नमूने एनआईवी पुणे भेजे जाने चाहिए। अगर एक सकारात्मक मामले का पता चलता है, तो पिछले 21 दिनों में रोगी के संपर्कों की पहचान करने के लिए तुरंत संपर्क करके उन्हें आइसोलेट किया जाएगा।