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स्वाइन फ्लू के बाद ''मंकी फीवर'' का बढ़ रहा खतरा, जानें लक्षण और बचाव

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक 20 से ज्यादा लोगों की मौत मंकी फीवर से हो चुकी है। पिछले हफ्ते जारी एक रिपोर्ट में कहा गया- “लेबोरेटरी टेस्ट में सिंधुदुर्ग जिले के अंदर 332 मामलों की पुष्टि हुई है, जिनमें से 19 मामले घातक थे।

स्वाइन फ्लू के बाद ''मंकी फीवर'' का बढ़ रहा खतरा, जानें लक्षण और बचाव

Written by akhilesh dwivedi |Updated : January 24, 2019 11:07 AM IST

स्वाइन फ्लू के खतरे के बाद भारत में आजकल मंकी फीवर का खौफ बढ़ गया है। देश के कुछ हिस्सों में इसका संक्रमण तेजी से फैल रहा है। अब तक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक 20 से ज्यादा लोगों की मौत मंकी फीवर से हो चुकी है। पिछले हफ्ते जारी एक रिपोर्ट में कहा गया- “लेबोरेटरी टेस्ट में सिंधुदुर्ग जिले के अंदर 332 मामलों की पुष्टि हुई है, जिनमें से 19 मामले घातक थे।

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क्या है मंकी फीवर 

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मंकी फीवर को क्यासनुर फॉरेस्ट डिजिज (केएफडी) भी कहा जाता है जो धीरे-धीरे फैलता है। 2016 में पहली बार पुष्टि के बाद से भारत में अब तक 322 लोग इसकी चपेट में आ चुके हैं। इनमें से 19 लोगों की मौत हो चुकी है। इसे क्यासनुर फॉरेस्ट डिजिज (केएफडी) भी कहा जाता है जो धीरे-धीरे फैलता है।

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मंकी फीवर के सामान्य लक्षण

मंकी फीवर के पीड़ित अक्सर तेज़ बुखार या फिर ब्लीडिंग होने की शिकायत करते हैं। इसके चलते शरीर में कंपकंपी, मानसिक अशांति का अहसास होता है। यही नहीं अनदेखी पर मौत भी हो सकती है। बीमारी घातक रूप पांचवें दिन के बाद लेना शुरू करती है। जब कंपकंपी छूटने जैसे दूसरे लक्षण दिखने शुरू होते हैं।

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कैसे और कहां फैला है ‘मंकी फीवर’

महाराष्ट्र के सिंधुदुर्ग जिले में स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया कि स्थिति नियंत्रण में है और मामलों में लगातार गिरावट आ रही है। लेकिन, रुस के कंज्यूमर वॉचडॉग रोस्पोट्रेब्नाड्ज़ोर ने भारत के पूर्वी तटीय इलाकों में जानेवाले पर्यटकों के लिए चेतावनी जारी की है।

कितने दिनों में ठीक होना चाहिये वायरल फीवर ?

सिंधुदुर्ग जिले के एक गांव में सबसे पहले यह केस सामने आया, जहां की आबादी करीब आठ लाख पचास हज़ार है। लेकिन, उसके बाद ये बीमारी तेज़ी से दूसरे गांवों में भी फैलने लगी। इस डर से कि इस बीमारी का इन्फैक्शन कई और लोगों को अपने चपेट में ले सकती है स्थानीय अधिकारी फौरन हरकत में आए ताकि केडीएफ को तेज़ी से फैलने से रोका जा सके।

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चारों ओर जंगलों से घिरे करीब 50 हजार गांव के लोगों को इस बीमारी के खिलाफ वैक्सीन दिए गए। इसके साथ ही, इसके इन्फैक्शन के शिकार होने की आशंका वाले लोगों के लिए मार्च 2016 से किट बांटे गए।

मंकी फीवर का इतिहास ?

मंकी फीवर यानि केएफडी की पहचान पहली बार साल 1957 में की गई थी। सेंटर्स फॉर डिजिज कंट्रोल एंड प्रीवेंसन (सीडीसी) के मुताबिक, हर साल दुनिया भर में यह बीमारी करीब 500 लोगों को चपेट में ले रही है।

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कैसे फैलता है मंकी फीवर ?

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मंकी फीवर लोगों से एक दूसरे में नहीं फैलता है। बल्कि, संक्रमित जानवरों का पंजा लगने या उसके संपर्क में आने से होता है, खासकर बंदरों से। दक्षिण भारत के तीन क्षेत्रों को इस बीमारी के लिए बेहद संवेदनशील माना गया है। मंकी फीवर से पीड़ित ज्यादातर मरीज एक या दो हफ्ते में ठीक हो जाते हैं।

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