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केरल में पिछले साल कोविड की काफी खतरनाक और भयानक लहर देखने को मिली थी जोकि अब भाग्यवश कम होती जा रही है। लेकिन जैसे ही कोविड के केसों में कमी आई तो केरल के वायनाड में मंकी फीवर का पहला केस देखने को मिल गया। इस फीवर के पहले मरीज एक 24 साल के पुरुष हैं। यह क्यानासुर फॉरेस्ट डिजीज से संक्रमित हुए थे और इसे ही मंकी फीवर भी कहा जाता है। इस मौसम में यह फीवर अधिक फैलने के कारण प्रशासन ने पहले से ही पूरे राज्य में अलर्ट जारी कर दिया है। डॉक्टर के मुताबिक संक्रमित मरीज की तबियत अभी स्थिर है और इसके अलावा और कोई केस देखने को नहीं मिला है।
यह एक टिक बॉर्न वायरल होमोरहाजिक फीवर है जोकि मौसमी होता है और यह भारत के दक्षिणी भाग में फैलता है। यह बीमारी येलो फीवर और डेंगू परिवार से ही संबंधित है। यह वायरस बंदरों में पाया जाता है और उनसे इंसानों में फैलता है।
एक्सपर्ट्स के मुताबिक संक्रमित टिक जब मानवों के संपर्क में आ जाते हैं या ऐसा पशु उन्हें काट लेता है तो मनुष्य भी इस वायरस से संक्रमित हो सकते हैं। यह पशु एक इंसान के सिवा अन्य व्यक्ति में यह संक्रमण नहीं फैला सकते हैं इसलिए इसका ट्रांसमिशन एक से दूसरे में नहीं होता है जो थोड़ी राहत की खबर है।
यह वायरस जंगलों में पाए जाने वाले जानवरों में अधिक होने के कारण जो लोग आदिवासी या जंगली इलाकों में रहते हैं उन्हें होने का अधिक खतरा रहता है। या फिर अगर यह जानवर शहरों में जा कर वहां किसी को काट लेते हैं तो उन्हें भी इस बीमारी का खतरा हो सकता है।
मंकी फीवर भारत के बहुत से क्षेत्रों में नहीं देखने को मिलता है। कोविड भी अभी पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ है इसलिए आपको इस फीवर के लक्षण अच्छे से पता होने चाहिए ताकि आप जान सकें कि आप किस बीमारी से संक्रमित हैं और फिर उससे ठीक होने के लिए उपचार शुरू करवा सकें। आइए जानते हैं