सर्वे में खुलासा, नॉन-मेट्रो में रहने वाली मांएं मेट्रो में रहने वाली मांओं से जीती हैं अधिक खुशहाल जीवन

एक सर्वे में यह बात सामने आई है कि मेट्रो में रहने वाली मांओं की जिंदगी में गैर-मेट्रो में रहने वाली मांओं की तुलना में बहुत अधिक तनाव है।

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Written By: Anshumala | Updated : September 21, 2019 9:18 AM IST

मॉमस्प्रेसो ने हाल ही में अपने मॉम्स हैप्पीनेस इंडेक्स सर्वे के दूसरे संस्करण को जारी किया। डायमंड प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (डीपीए) के साथ मिलकर कराए गए इस सर्वेक्षण ‘मॉम्स हैप्पीनेस इंडेक्स 2019’ (moms happiness index 2019) में देशभर की 2000 से भी अधिक मांओं को शामिल किया गया। इस अध्ययन से कई चौंकाने वाली जानकारी सामने आई। इस अध्ययन के अनुसार, भारत भर में 48% मांएं जीवन की अपनी वर्तमान स्थिति से खुश हैं, वहीं गैर-मेट्रो शहरों में रहने वाली मांएं मेट्रो में रहने वाली मांओं की तुलना में अधिक खुश हैं।

सर्वेक्षण में यह भी पाया गया कि गैर-मेट्रो में रहने वाली अधिक मांएं अपने आपको अच्छी मां के तौर पर रेट करती हैं। उनका वैवाहिक जीवन खुशहाल है और परिवार ज्यादा सहयोग करने वाला है। अप्रत्याशित रूप से डाटा ने संकेत दिया कि मेट्रो में रहने वाली मांओं की जिंदगी में गैर-मेट्रो में रहने वाली मांओं की तुलना में बहुत अधिक तनाव है।

ये हैं खुश रहने के कारक

देश भर में मांओं की खुशी के प्रमुख कारक हैं- मैं कितनी अच्छी मां हूं ? मेरे पति कितने सपोर्टिव हैं? मेरे पास अपने लिए कितना समय है? आर्थिक रूप से मैं कितनी सशक्त हूं? ससुराल वाले कितने सपोर्टिव हैं? निष्कर्षों के अनुसार, मेट्रो में रहने वाली मांओं की तुलना में गैर-मेट्रो में रहने वाली मांओं ने स्वयं, अपने पति और बच्चों को अच्छी रेटिंग दी है।

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गैर-मेट्रो में रहने वाली महिलाएं शादी से हैं खुश

गैर-मेट्रो में रहने वाली 66% मांओं का हफ्ते में दो से तीन बार अपने पति के साथ क्वालिटी टाइम गुजरता है, वहीं मेट्रो में रहने वाली 55% मांओं के साथ ही ऐसा होता है। इतना ही नहीं, नॉन-मेट्रो में रहने वाली 72% मांओं ने माना कि उन्हें बच्चों को अनुशासित करने में अपने पति का सहयोग मिलता है, जबकि मेट्रो में रहने वाली सिर्फ 63% माताओं का ही ऐसा अनुभव रहा। इसके अलावा, गैर-मेट्रो में रहने वाली 69% माताओं ने कहा कि वे अपनी शादी से खुश हैं, जबकि मेट्रो में रहने वाली सिर्फ 56% मांतओं ने ऐसा कहा।

जब बात उनके व्यापक सपोर्ट सिस्टम की आती है, तो मेट्रो में रहने वाली माताओं की तुलना में गैर-मेट्रो में रहने वाली माताओं को घर के काम के लिए ससुराल वालों से अधिक मदद मिलती है। मी-टाइम एक और महत्वपूर्ण कारक है और माताएं व्यायाम करने, दोस्तों से मिलने और वह काम करने के लिए समय निकालने की कोशिश करती हैं, जो उन्हें पसंद है।

आर्थिक रूप से होना चाहती हैं स्वतंत्र

किसी भी मां की खुशी को निर्धारण करने वाला एक अन्य महत्वपूर्ण कारक है वित्तीय सशक्तिकरण और स्वतंत्रता, जैसा कि सर्वेक्षण से संकेत मिलता है। सर्वेक्षण में शामिल 80% माताओं ने अपने बच्चों के लिए अच्छा रोल मॉडल बनने के लिए आर्थिक रूप से स्वतंत्र होने की इच्छा व्यक्त की। इसके अलावा वे अपनी सेल्फ-आइडेंटिटी को बढ़ाने और अपने सपनों को पूरा करने के लिए वित्तीय स्वतंत्रता चाहती हैं। इतना ही नहीं ''मॉम्स हैप्पीनेस इंडेक्स 2019'' (moms happiness index 2019) ने भारतीय माताओं के प्रमुख तनाव बिंदुओं की पहचान भी की, जिसमें बच्चे की सुरक्षा, इंटरनेट और गैजेट्स का उपयोग, भोजन की आदतें, अनुशासन और अध्ययन शामिल हैं।

सर्वेक्षण के परिणामों पर बात करते हुए मॉमस्प्रेसो के सीईओ विशाल गुप्ता ने कहा, “मॉम्स हैप्पीनेस सर्वे भारतीय मां की खुशी को निर्धारित करने वाले विभिन्न कारकों को समझने का एक महत्वपूर्ण उपकरण है। इस वर्ष के सर्वेक्षण ने हमें मेट्रो और गैर-मेट्रो में रहने वाली मांओं के बीच खुशी के स्तर और उसके अंतर के बारे में बहुत महत्वपूर्ण जानकारी दी है। हमने यह भी देखा है कि मां की खुशी का सीधा-सीधा ताल्लुक उसके जीवन में आने वाले विभिन्न हितधारकों के समर्थन के स्तर से है। ''मॉम्स हैप्पीनेस इंडेक्स 2019'' के माध्यम से इन महत्वपूर्ण बिंदुओं को सामने लाकर हम भारतीय मांओं की समग्र खुशी पर बातचीत को बढ़ावा देना चाहते हैं।”