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बच्चों को केवल इतनी देर करने दें फोन इस्तेमाल, वर्ना पड़ जाएगा पछताना, मेंटल हेल्थ पर पड़ेगा असर

बच्चों को केवल इतनी देर करने  दें फोन इस्तेमाल, वर्ना पड़ जाएगा पछताना, मेंटल हेल्थ पर पड़ेगा असर

लेकिन, एक नयी स्टडी की मानें फोन का अधिक इस्तेमाल करने से लोगों को मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं। 

Written by Sadhna Tiwari |Updated : December 8, 2023 1:48 AM IST

Smartphone side effects in youngsters: स्मार्टफोन, लैपटॉप और अन्य कई गैजेट्स आज लोगों के जीवन का हिस्सा बन गए हैं और लोग इनका इस्तेमाल दिन में कई-कई बार या कई घंटों तक करते हैं। कुछ लोगों के लिए स्मार्टफोन के बिना रह पाना मुश्किल होता है। लेकिन, एक नयी स्टडी की मानें फोन का अधिक इस्तेमाल करने से लोगों को मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं। एक स्टडी में खुलासा हुआ है जो लोग 4 घंटों से अधिक समय के लिए स्मार्टफोन का इस्तेमाल करते हैं उन्हें इसकी लत लग सकती है और उनकी मेंटल हेल्थ पर इसका खराब असर भी पड़ सकता है।

बच्चों में स्मार्ट फोन से बढ़ सकती हैं ये समस्याएं

इस स्टडी में कहा गया है कि, बीते कुछ वर्षों में यंगस्टर्स और नाबालिग और टीनएजर्स के बीच मोबाइल फोन का इस्तेमाल बहुत अधिक बढ़ गया है। स्मार्टफोन का इस्तेमाल करने से उन्हें मेंटल हेल्थ से जुड़ी समस्याओं के साथ-साथ कुछ अन्य परेशानियां भी बड़े पैमाने पर महसूस हो रही हैं, जैसे-

यह स्टडी की कोरिया के हन्यांग यूनिवर्सिटी मेडिकल सेंटर की टीम द्वारा जिन्होंने स्टडी के दौरान 50,000 से अधिक नाबालिग प्रतिभागियों के डेटा का विश्लेषण किया। स्टडी में पाया गया कि

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  • जो नाबालिग बच्चे हर दिन 4 घंटे से ज्यादा समय तक स्मार्टफोन का इस्तेमाल करते हैं उनमें स्ट्रेस बहुत अधिक देखा गया।
  • वहीं, इन लोगों में आत्महत्या करने के विचार भी अधिक देखे गए।  जबकि, इन लोगों में लत लगने का रिस्क भी हाई था।

स्टडी के परिणाम ओपन-एक्सेस जर्नल पीएलओएस वन में प्रकाशित किए गए हैं जिसमें कहा गया कि, जो नाबालिग हर दिन 1 से 2 घंटे तक स्मार्टफोन का इस्तेमाल करते हैं, उन्हें उन लोगों की तुलना में कम समस्याएं महसूस होती हैं जो बिल्कुल भी स्मार्टफोन का इस्तेमाल नहीं करते।

स्टडी के लेखकों का कहना है कि यह स्टडी स्मार्टफोन के इस्तेमाल और हेल्थ पर उसके साइड-इफेक्ट्स के बीच के संबंध की पुष्टि नहीं करता है। लेकिन, स्टडी के निष्कर्ष के अनुसार, नाबलिगों के लिए फोन के इस्तेमाल से जुड़े कुछ नियम बनाने और उनसे जुड़ी गाइडलाइंस बनाने से उनकी मदद हो सकती है। हालांकि, फोन का इस्तेमाल लगातार बढ़ता जा रहा है और बच्चे और यंगस्टर्स भी करते हैं।