
साधना तिवारी
साधना तिवारी 15 वर्षों से मीडिया क्षेत्र में हैं। लगभग 9 वर्षों से अधिक समय से ZEE ग्रुप के साथ जुड़ी हुई ... Read More
Written By: Sadhna Tiwari | Updated : June 2, 2021 10:46 AM IST
Covid Vaccinations in India: देशभर में कोरोना वायरस संक्रमण के खिलाफ वैक्सीनेशन ड्राइव चलायी जा रही है। लोगों द्वार इस मुहिम को अच्छा प्रतिसाद भी मिला है लेकिन, इन सबके बीच वैक्सीन्स की खुराकों की कमी से भी लोगों को जूझना पड़ा है। देशभर में वैक्सीन्स के स्टॉक पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध ना होने की वजह से बार-बार वैक्सीनेशन के नियमों में बदलाव भी किए जाते हैं और कई स्थानों पर वैक्सीनेशन कार्यक्रम रद्द भी करने पड़े। वहीं, दूसरी तरफ अब एक्सपर्ट्स ने इसका एक हल सुझाया है। इन विशेषज्ञों का कहना है कि अगर 2 अलग-अलग वैक्सीन्स की डोज़ लोगों की दी जाए तो देश में महसूस हो रही वैक्सीन्स की किल्लत को कम किया जा सकता है। (Mixing Vaccines in Hindi)
बता दें कि, भारत सरकार द्वारा स्पष्ट रुप से कहा जा चुका है कि जब तक वैज्ञानिकों द्वारा वैक्सीन की खुराकें मिक्स करने के सकारात्मक परिणाम सामने नहीं आते। तब तक इस तरह से लोगों को वैक्सीन लगाने की अनुमति नहीं दी जा सकती है। फिलहाल अभी तक ऐसे ट्रायल्स नहीं हुए हैं जिनमें 2 वैक्सीन्स को मिलाकर लोगों को लगाने के परिणामों और दुष्परिणामों का पता चल सके। वहीं, चूहों पर किए गए कुछ प्रयोगों और अध्ययनों में यह पता चला है कि 2 अलग-अलग प्रकार की वैक्सीन्स को मिक्स करके लगाने से बेहतर इम्युन रेस्पांस ट्रिगर हो सकता है। लेकिन, ह्यूमन ट्रायल्स ना होने के कारण फिलहाल इस प्रयोग को मंज़ूरी नहीं दी जा रही है। (Mixing vaccine for covid vaccination in India)
गौरतलब है कि, भारत सरकार ने फिलहाल 2 वैक्सीन्स को मिश्रित कर उन्हें लोगों को लगाने की अपील को नामंजूर कर दिया है। वहीं, दूसरी तरफ एक्सपर्ट्स का मानना है कि विभिन्न वैक्सीन्स वायरस के अलग-अलग हिस्सों पर वार करते हैं। ऐसे में 2 अलग-अलग वैक्सीन्स को मिक्स करके लगाने से उस व्यक्ति का इम्यून सिस्टम बेहतर तरीके से तैयार हो सकता है।
वैक्सीन्स को मिक्स करने का एक और फायदा यह भी है कि इस तरीके से लगातार सामने आ रहे कोविड वेरिएंट्स से भी सुरक्षा प्राप्त होती है। इस बात को स्पष्ट करने के लिए स्पेन में 600 लोगों पर किए गए एक अध्ययन का उदाहरण दिया गया। इस स्टडी में हिस्सा ले रहे 400 लोगों को कोविशील्ड की पहली खुराक दी गयी और लगभग 7-8 सप्ताह बाद फाइज़र वैक्सीन की दूसरी खुराक दी गयी। स्टडी के अंत में देखा गया कि मिश्रित वैक्सीन्स लेने वाले लोगों में एक ही वैक्सीन की दोनों डोज़ लेने वाले लोगों की तुलना में अधिक ऐंटीबॉडीज़ का निर्माण हुआ था।
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