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Written By: Anshumala | Published : August 9, 2018 1:00 PM IST
पूर्वी भारत के ओडिशा के एक सुदूर गांव में रहने वाली 18 वर्षीय मीता सबर नाम की एक लड़की दुर्लभ बीमारी प्लेक्सिफॉर्म न्यूरोफिब्रोमैटोसिस (plexiform neurofibromatosis) से जूझ रही है, जिसे देखकर हर कोई हैरान है। पैसे के अभाव में वह काफी वर्षों तक अपना इलाज कराने में भी असमर्थ थी। उसके हाथ को देखकर आप हैरान हो जाएंगे। इस बीमारी के कारण टीनएजर मीता के दाएं हाथ का वजन लगभग 10 किलो (22 एलबी) हो गया है। इस स्थिति में उसका हाथ इतना भारी हो गया है कि उसे उठाने में भी वह असमर्थ है।
वह जब सिर्फ 12 वर्ष की थी, तब से ही उसकी पीठ पर इस बीमारी का विकास होने लगा और धीरे-धीरे उसके हाथ में भी फैल गया। आज मीता ठीक से उस हाथ से कुछ करने में भी अक्षम है। दाएं हाथ में जब से यह बीमारी हुई है, इसके कारण न तो वह ठीक से चल पाती है और न ही पढ़ाई कर पाती है। पूरी तरह से उसका यह दायां हाथ मृत हो चुका है।
मीता अनाथ है, जो अपनी बहन कुमारी के साथ रहती है। उसके पास इलाज कराने के लिए भी पैसे नहीं हैं। हालांकि, मीता को मुफ्त इलाज करवाने की कई मदद भी मिली थी, लेकिन उसके मन में सर्जरी को लेकर एक डर था, जिसके कारण वह बार-बार मना कर दिया करती थी। उसे लगता था कि सर्जरी के दौरान उसकी कहीं मृत्यु न हो जाए। कई काउंसलिंग के बाद, अब वह नि:शुल्क उपचार के लिए तैयार हो चुकी है।
वर्ष 2014 में, राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के राज्य स्वास्थ्य कर्मियों ने जन्म से 19 वर्ष की आयु तक किसी भी स्वास्थ्य समस्या के लिए बच्चों को स्क्रीन करने के लिए एक पहल शुरू की थी। इसी दौरान उन्हें स्थानीय गांव में मीता के बारे में पता चला।
हेल्थ वर्कर्स मीता को एससीबी मेडिकल कॉलेज में लेकर गए, जहां डॉक्टरों ने सर्जरी से पहले एक रिस्क बॉन्ड पर साइन करने को कहा, पर डर के कारण उन्होंने ऐसा करने से मना कर दिया। वक्त बीता, दोबारा 2017 में उन्हीं हेल्थ वर्कर्स ने मीता को फिर से उसी हॉस्पिटल में ले गए। वहां उनकी मुलाकात डॉ. राजेश्वर पटनायक से हुई। तब मीता का दर्द काफी बढ़ चुका था। उसका हाथ भी पहले से काफी बड़ा हो गया था और उसका स्वास्थ्य बिगड़ गया था।
अस्पताल के प्लास्टिक सर्जरी विभाग के प्रमुख डॉ. आनंद प्रसाद पटनायक ने उसकी इस बीमारी का गहन परीक्षण किया। फिलहाल, उसके इलाज में एमआरआई, सीटी स्कैन, बायोप्सी, एंजियोग्राफी और रक्त के नमूने आदि सभी संभावित परीक्षण किए जाएंगे। तभी उसकी हालत का ठीक-ठीक पता चल सकेगा जिससे आगे सर्जरी करने में आसानी होगी। डॉ. पटनायक का कहना है कि इलाज कब तक चलेगा यह कहना अभी मुश्किल है। निदान होने के बाद ही उपचार शुरू करेंगे और उसके बाद ही सर्जरी हो सकती है।
क्या है प्लेक्सिफॉर्म न्यूरोफिब्रोमैटोसिस?
प्लेक्सिफॉर्म न्यूरोफिब्रोमैटोसिस एक ऐसी स्थिति है, जो शरीर के किसी भी हिस्से में ट्यूमर की तरह बढ़ने लगती है। अध्ययन के अनुसार, यह अमेरिका और ब्रिटेन में 3,000 लोगों में से एक को प्रभावित करता है। यह सबसे अधिक सिर, गर्दन, हाथ, पैर, पीठ और आंतरिक अंगों को प्रभावित करता है। ऐसे ट्यूमर धीरे-धीरे बढ़ते हैं और फिर बाद में बहुत भयानक रूप ले लेते हैं। जब यह बड़ा होता है, तो वे डिसफिगरमेंट, मस्तिष्क की समस्या, अंगों की कार्य क्षमता का प्रभावित होना साथ ही भयंकर दर्द भी होता है। इस तरह की जटिलताएं लगभग 60 प्रतिशत रोगियों में देखी जाती है। इस बीमारी के उपचार का एक मात्र विकल्प सर्जरी है, जो लगभग 75 प्रतिशत रोगियों को ठीक कर सकता है।
चित्रस्रोत- Caters News Agency.