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रीढ़ की बीमारियों का कारगर इलाज है एमआईएस, जानिए कब करवानी चाहिए यह सर्जरी

अगर नियमित एक्सरसाइज और दवा के सेवन से छह सप्ताह में आराम नहीं मिलता है तो मिनिमली इनवेसिव स्पाइन सर्जरी कारगर हो सकती है।

देश में पिछले कुछ वर्षो से स्पाइन से जुड़ी बीमारियों में खासा इजाफा हुआ है और अगर नियमित एक्सरसाइज और दवा के सेवन से छह सप्ताह में आराम नहीं मिलता है तो मिनिमली इनवेसिव स्पाइन (एमआईएस) सर्जरी सबसे कारगर व सुरक्षित तकनीक है, जिससे मरीज को राहत मिल सकती है।

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स्पाइन सॉल्यूशन्स इंडिया के निदेशक व स्पाइन सर्जन डॉ. सुदीप जैन ने कहा, "स्पाइन संबंधित रोगों में ज्यादातर मरीज कमर और गर्दन में असहनीय दर्द, नसों में खिंचाव और स्लिप डिस्क से ग्रस्त हो रहे हैं। इस शारीरिक समस्या से निजात नियमित एक्सरसाइज करके भी मिल सकती है। लेकिन, यह बात बेहद महत्वपूर्ण है कि आप इस पीड़ा का सामना कब से कर रहें हैं और परेशानी किस स्तर पर है। नियमित एक्सरसाइज करने के बाद भी दर्द से निजात नहीं मिलने पर डॉक्टर आपको कुछ दवाएं लिख सकते हैं।"

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क्‍या कहते हैं विशेषज्ञ

उन्होंने कहा, "नियमित एक्सरसाइज और दवाइयों के सेवन से अगर छह सप्ताह में आराम नहीं मिलता है तो उसके बाद सर्जरी ही एकमात्र विकल्प बचती है। स्पाइन सर्जरी में सबसे कारगर और सुरक्षित तकनीक मिनिमली इनवेसिव स्पाइन (एमआईएस) सर्जरी है। इस सर्जरी की सबसे बड़ी खासियत यह है कि स्पाइन सर्जरी के लिए सुबह पहुंचा रोगी शाम तक घर जा सकता है।"

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डॉ. सुदीप जैन ने कहा, "इलाज का वह जमाना बीत चुका है, जब स्पाइन का ऑपरेशन बेहद जटिल होता था और उसकी सफलता की कोई गारंटी भी नहीं होती थी। पीड़ित व्यक्ति को महीनों का बेड रेस्ट और आजीवन सावधानी बरतने की सलाह दी जाती थी। आज के दौर में महीनों का आराम और सावधानी बरतना तो दूर रहा, एमआईएस सर्जरी तकनीक से ऑपरेशन के बाद से रोगी ऑपरेशन के तुरंत बाद सामान्य जीवन में लौट सकते हैं।"

उन्होंने कहा कि सावधानी बरत कर स्पाइन से संबंधित बीमारियों को विकसित होने के जोखिम को कम किया जा सकता है। आप अधिक वजन उठाने से बचें, वजन को नियंत्रित रखें, कंप्यूटर पर सही पोस्चर में बैठ कर काम करें, लंबी अवधि में बैठने से बचे, मांसपेशियों को मजबूत करने के लिए नियमित व्यायाम करें।

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कब हो सर्जरी

विशेषज्ञों के अनुसार जब गर्दन और कमर के मामले में रीढ़ के इलाज की बात आती है, तो सर्जरी का विकल्प अत्यंत कारगर होता है। लेकिन अगर तीन से छह महीनों तक ऑपरेशन के बगैर इलाज करने से कोई सुधार न हो या फिर हालत और बिगड़ जाए तो सर्जिकल उपचार ही उपयुक्त है। सर्जरी का फैसला अलग-अलग मरीजों की भिन्न स्थिति के आधार पर लिया जाता है।

कैसे होती है यह सर्जरी

एमईएस सर्जरी के अंतर्गत न्यूरो स्पाइन सर्जन त्वचा में एक छोटा चीरा लगाकर रीढ़ तक पहुंचने के लिए विशेष उपकरणों का उपयोग करते हैं। पारंपरिक ओपन स्पाइन सर्जरी में 5 से 6 इंच लंबे चीरे लगाए जाते हैं, जबकि एमईएस तकनीक में सवा सेमी. से लेकर सवा इंच के चीरे लगाए जाते हैं। एमईएस से मांसपेशियों और रीढ़ से संबंधित अन्य अंगों को कम से कम चोट पहुंचती है। इस प्रक्रिया से सर्जन को समस्याग्रस्त स्थान की उपयुक्त स्थिति जानने में मदद मिलती है। इस तरह टिश्यूज की भी कम से कम क्षति होती है और सर्जरी के दौरान खून की हानि भी कम होती है और मरीज के जिस्म पर ऑपरेशन के निशान भी कम पड़ते हैं। माइक्रो एंडोस्कोपिक सर्जरी के बाद मरीज दो से तीन दिनों में ही घर लौट सकता है।

इनपुट : IANS Hindi

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