विश्‍व की पहली मलेरिया वैक्सीन से लाखों बच्चों को मिलेगा फायदा, अगले 3 वर्षों में उपलब्ध होंगे 18 मिलियन डोज

डब्ल्यूएचओ (WHO) के डाटा के अनुसार, 30 से अधिक देशों में हाई मलेरिया वाले स्थान हैं, जहां एक बार मांग बढ़ने पर यह वैक्सीन हर साल 25 मिलियन से अधिक बच्चों को मलेरिया से सुरक्षा दे सकती है.

WrittenBy

Written By: Atul Modi | Published : August 17, 2022 3:38 PM IST

यूनिसेफ ने दवाई कंपनी GSK को 170 मिलियन डॉलर देकर मलेरिया की पहली वैक्सीन के लिए कॉन्ट्रैक्ट दिया. यूएन एजेंसी ने एक स्टेटमेंट में कहा है कि अगले तीन वर्षों में आरटीएस, एस (RTS,S) की 18 मिलियन डोज उपलब्ध होगी, जिससे हर साल हजारों बच्चों की जान बचाई जा सकती है.

यूनिसेफ के सप्लाई डिविजन के डायरेक्टर एटेलवा काडिली ने कहा है कि, मलेरिया की वैक्सीन बनाने वालों को अपना काम जारी रखना है क्योंकि इस वैक्सीन की जरूरत बढ़ने की संभावना है. यह वैक्सीन बच्चों के जीवन को बचाने के लिए और मलेरिया को कम करने के लिए एक बड़ा प्रयास है.

डब्ल्यूएचओ (WHO) के डाटा के अनुसार, 30 से अधिक देशों में हाई मलेरिया वाले स्थान हैं, जहां एक बार मांग बढ़ने पर यह वैक्सीन हर साल 25 मिलियन से अधिक बच्चों को मलेरिया से सुरक्षा दे सकती है.

आरटीएस, एस मलेरिया वैक्सीन 35 वर्षों के रिसर्च का परिणाम है और यह किसी पैरासाइट बीमारी के खिलाफ पहली वैक्सीन है. यह वैक्सीन प्लास्मोडियम फाल्सीपेरम के खिलाफ काम करती है, जो ग्लोबली सबसे खतरनाक मलेरिया पैरासाइट है और अफ्रीका में इसका सबसे ज्यादा प्रभाव देखा जा सकता है.

यूनिसेफ ने कहा कि इस वैक्सीन को बनने में 18 महीने की तैयारी और मेहनत लगी है. प्रभावित देशों में मलेरिया की वैक्सीन की मांग ज्यादा होने की संभावना है. किसी भी नई वैक्सीन के जैसे इसकी मांग पहले सीमित होगी और समय के साथ-साथ बढ़ती रहेगी. इस वैक्सीन की मांग बढ़ने पर इसकी मैन्युफैक्चरिंग भी बढ़ती जाएगी.

Source: ANI

Add The Health Site as a Preferred Source Add The Health Site as a Preferred Source