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Written By: TheHealthSite.com | Published : August 30, 2023 10:26 AM IST
खाना पैक करना हो या फिर बाहर से हमें सामान लाना हो, हर चीज को पैक करने के लिए हम प्लास्टिक का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन यह प्लास्टिक न सिर्फ हमारे पर्यावरण को दूषित कर रहा है, बल्कि इससे हमारा मस्तिष्क भी दूषित हो रहा है। एक अध्ययन के अनुसार, माइक्रोप्लास्टिक हमारे शरीर को उतना ही व्यापक रूप से प्रभावित कर रही है, जितना पर्यावरण को। इसकी वजह से मस्तिष्क के व्यवहार में बदलाव हो रहे हैं, खासतौर पर बुजुर्गों के मस्तिष्क को बुरी तरह से यह डैमेज कर रहा है।
प्लास्टिक, मुख्य रूप से माइक्रोप्लास्टिक्स हमारे ग्रह के सबसे दूषित घटकों में से एक है। यह दुनियाभर में जल, हवा, पानी, खाद्यपदार्थों को दूषित कर रहा है। अमेरिका में रोड आइलैंड विश्वविद्यालय के रिसर्चर्स ने न्यूरोबिहेवियरल प्रभावों और माइक्रोप्लास्टिक्स के संपर्क में आने वाली सूजन प्रतिक्रिया के साथ-साथ मस्तिष्क सहित टिश्यूज में माइक्रोप्लास्टिक्स के स्टोरेज को लेकर रिसर्च किया है। इस टीम वे तीन सप्ताह के दौरान युवा और बूढ़े चूहों को पीने के पानी में माइक्रोप्लास्टिक के विभिन्न स्तर मिलाकर दिएं हैं।
इंटरनेशनल जर्नल ऑफ मॉलिक्यूलर साइंस में प्रकाशित रिसर्च के मुताबिक, माइक्रोप्लास्टिक एक्सपोजर मनुष्य के व्यवहार, लिवर और मस्तिष्क के टिश्यूज को डैमेज कर रहा है। अध्ययन में शामिल चूहों ने अजीब ढंग से चलना और व्यवहार करना शुरू कर दिया, जिससे मनुष्यों में मनोभ्रंश के समान व्यवहार प्रदर्शित हुआ। वृद्ध जानवरों में परिणाम और भी गहरे थे।
शोधकर्ताओं का कहना है कि हमारे लिए यह एक आश्चर्यजनमक बात यह है कि माइक्रोप्लास्टिक्स की न ही हाई डोज, बल्कि नाम मात्र खुराक भी आपके शरीर में कई तरह के बदलाव ला सकती है। माइक्रौप्लास्टिक आपके जीवन चक्र को भी प्रभावित करती है। उदाहरण के लिए कम उम्र में ही बूढ़ा दिखना कहीं न कहीं इसके पीछे माइक्रोप्लास्टिक जिम्मेदार है।