
... Read More
Written By: Anshumala | Published : November 20, 2018 2:10 PM IST
पोस्ट ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर एक प्रकार का एंग्जाइटी डिसऑर्डर है। © Shutterstock.
पोस्ट ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर एक प्रकार का एंग्जाइटी डिसऑर्डर है, जो ज्यादातर लोगों में युद्ध, हत्या, प्राकृतिक आपदाओं, दुर्घटनाओं और किसी हिंसक हमलों जैसे भयानक घटनाओं को देखकर या अनुभव करने के बाद विकसित होता है।
परंपरागत रूप से, लंबे समय तक का एक्सपोजर थेरेपी (prolonged exposure therapy) जैसे तरीकों से पीटीएसडी से पीड़ित मरीजों का इलाज किया जाता रहा है।
लांसेट साइकियाट्री जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन से पता चला है कि ट्रान्सेंडेंटल मेडिटेशन पीटीएसडी के लक्षणों की गंभीरता को कम करने के लिए एक व्यवहार्य विकल्प साबित हो सकता है। इस प्रकार यह कंवेन्शनल प्रोलॉन्ग्ड एक्सपोजर आधारित उपचारों के लिए एक अच्छा विकल्प प्रदान करता है।
पेरिटोनियल कैंसर से पीड़ित हैं नफीसा अली, जानें कारण, लक्षण और इलाज
ट्रान्सेंडेंटल मेडिटेशन मंत्र को लगातार सोचने और अंततः एक शांतिपूर्ण अवस्था में बसने की एक सहज तकनीक होती है।
यह अध्ययन अमेरिका के 203 युद्ध दिग्गजों (war veterans) पर किया गया जो एक्टिव मिलिटरी सर्विस में होने के कारण पीटीएसडी से प्रभावित हुए थे।
अमेरिका के महर्षि यूनिवर्सिटी ऑफ मैनेजमेंट रिसर्च इंस्टीट्यूट के सह-लेखक डॉ. सैनफोर्ड निडिच के मुताबिक, पीसीएसडी कार्डियोवैस्कुलर स्वास्थ्य, व्यावसायिक कामकाज और यहां तक कि स्मृति यानी याददाश्त को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकता है।
तीन सप्ताह तक चले इस शोध से पता चला है कि मेडिटेशन पारंपरिक उपचार की ही तरह काफी प्रभावी होता है। यहां तक कि हेल्थ एजुकेशन क्लासेज से भी अधिक फायदेमंद होता है।
क्या है पीटीएसडी
पोस्ट ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर अर्थात पीटीएसडी दिमाग की एक ऐसी स्थिति होती है जो किसी भयावह या दुखद घटना जैसे युद्ध, दुघर्टना, मौत, धोखेबाजी का शिकार होने या उसका साक्षी बनने के कारण ट्रिगर होती है। इसके लक्षणों में फ्लैशबैक, बुरे सपने आना और गंभीर चिंता व घटना के बारे में बेकाबू करने वाले विचारों का आना शामिल होता है। इसका इलाज आमतौर पर साइकोथेरेपी जैसे कॉग्निटिव थेरेपी (Cognitive therapy), एक्सपोजर थेरेपी (Exposure therapy) व ईएमडीआर आदि से किया जाता है।
Disclaimer: The content on TheHealthSite.com is only for informational purposes. It is not at all professional medical advice. Always consult your doctor or a healthcare specialist for any questions regarding your health or a medical condition.