
साधना तिवारी
साधना तिवारी 15 वर्षों से मीडिया क्षेत्र में हैं। लगभग 9 वर्षों से अधिक समय से ZEE ग्रुप के साथ जुड़ी हुई ... Read More
Written By: Sadhna Tiwari | Updated : November 18, 2020 1:46 PM IST
Measles Outbreak: कोरोना वायरस महामारी के दौरान दुनियाभर में लोगों का जीवन बदल गया है। लॉकडाउन की वजह से लोगों को अब बहुत ज़रूरी कामों के लिए बाहर निकलने की इज़ाज़त है। ऐसे में लोगों के रेग्यूलर हेल्थ चेकअप्स जैसे काम भी रोकने पड़े हैं। वहीं, बच्चों की ज़िंदगी पर कोरोना वायरस की दोहरी मार पड़ी है। एक तरफ बच्चे जहां घरों में बंद हैं वहीं, उनके लिए कई बीमारियों का ख़तरा भी बढ़ गया है। ऐसी ही एक बीमारी है खसरा, जिसका खतरा दुनियाभर के करोड़ों बच्चों के सिर पर मंडरा रहा है। (Measles Risk during Covid-19 Pandemic)
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने नया डेटा जारी किया है। जिसके अनुसार, बीते साल में दुनिया भर में सबसे ज्यादा 2.07 लाख लोगों की मौत हुई है। जिसकी बड़ी वजह वैक्सीन लगाने में ढिलाई मानी जा रही है। वही, जर्नल ‘लैंसेट’ में प्रकाशित एक लेख में वैज्ञानिकों ने खसरे के प्रकोप के बढ़ने की आशंका जतायी है। (Measles Outbreak )
एक्सपर्ट्स का कहना है कि, कोरोना की वजह से साल 2020 में भी वैक्सीन्स लगाने में बहुत देरी हो रही है। इससे बीमारियों का खतरा बढ़ता जा रहा है और उन्हें कंट्रोल करना भी मुश्किल हो रहा है। WHO और अमेरिका के सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल का कहना है कि, इस साल जिन 26 देशों ने कोरोना के कारण बीमारियों का टीकाकरण रोका था उनमें से आधे देशों में खसरा का प्रकोप फैल चुका है। आंकड़ों के मुताबिक, इस साल खसरा वैक्सीन (Measles Vaccine) पानी के कारण 9.4 करोड़ लोगों पर जोखिम मंडरा रहा है।
WHO अधिकारियों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में बच्चों को ज़रूरत के हिसाब से खसरा के टीके नहीं लगाए गए हैं। जिसके चलते, खसरे का खतरा बढ़ गया है। इसीलिए, कोरोना काल में बच्चों के वैक्सीनेशन में किसी भी प्रकार की लापरवाही करना ठीक नहीं। वहीं, एक्सपर्ट्स का यह भी कहना है कि बड़ी संख्या में खसरे की वैक्सीन न मिल पाने से 2021 में खसरा के मरीज़ों की संख्या में भारी इज़ाफा हो सकता है।
एक्सपर्ट्स ने सभी देशों को जल्द से जल्द खसरे को अगली महामारी बनने से रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाने की अपील की है। रिसर्चर्स का यह भी अनुमान है कि पर्याप्त पोषण ना मिल पाने की वजह से भी कोरोना काल के बाद बहुत से बच्चे खसरा की चपेट में आ सकते हैं। खासकर, गरीब और मध्यम आय वाले देशों में बच्चों को कोरोना काल में पोषक भोजन नहीं मिल पा रहा है। जिससे वहां के इस बीमारी के गम्भीर होने का डर अधिक है।