सर्दियों में होने वाले स्किन रैशेज और खसरे के लक्षणों में होते हैं ये 2 अंतर, ऐसे करें बीमारी की पहचान

मुंबई महानगर पालिका ने मीजल्स के बढ़ते केसेस की संख्या को ध्यान में रखते हुए शहर में खसरे का आउटब्रेक होने की घोषणा कर दी है।

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Written By: Sadhna Tiwari | Updated : November 16, 2022 10:33 AM IST

Measles Outbreak In Mumbai: मुंबई शहर में मीजल्स की बीमारी के मामले दिन-ब-दिन बढ़ते जा रहे हैं। मिली ताजा जानकारी के अनुसार, शहर में अब तक मीजल्स के कुल 109 मामलों की पुष्टि हो चुकी है। वहीं, 50 बच्चे अस्पताल में भर्ती हैं जबकि एक बच्चा वेंटीलेटर पर है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 80 से अधिक मामले केवल गोवंडी इलाके में पाए गए हैं वहीं, शहर 3 ऐसे मामले भी सामने आए जहां बहुत छोटे बच्चों को खसरा हो गया और इसी बीमारी से उनकी मौत हो गयी। (Measles outbreak in Mumbai in Hindi.)

मुंबई महानगर पालिका (BMC) ने मीजल्स के बढ़ते केसेस की संख्या को ध्यान में रखते हुए शहर में खसरे का आउटब्रेक होने की घोषणा कर दी है। वहीं, प्रभावित इलाकों में स्वास्थ्य अधिकारियों और आशा कार्यकर्ताओं (Asha workers) को घर-घर जाकर सर्वे करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही बच्चों को खसरे या मीजल्स का टीका लगाने के लिए तैयार करने और जागरूकता फैलाने का भी काम किया जा रहा है। (Vaccination drive for measles rubella in Mumbai)

खसरा में टीकारण जरूरी क्यों ?

बता दें कि मीजल्स या खसरेकी बीमारी का स्थायी इलाज केवल इससे बचाव ही है। मीजल्स से बचाव के लिए लोगों को खसरे का टीका (MR1-measles and rubella vaccine) लगवाना चाहिए। एक्सपर्ट्स के अनुसार, खसरे से बचाव का एकमात्र उपाय फिलहाल वैक्सीन ही है। खसरे या मीजल्स से सुरक्षित रखने के लिए बच्चे को 2 टीके लगाए जाते हैं।

मीजल्स के लक्षणों का ना समझें ठंड का असर

बता दें कि विश्व स्वास्थ्य संगठन  (World Health Organization) द्वारा मीजल्स को दुनियाभर में फैली बच्चों की एक गम्भीर बीमारी बताया गया है। हर साल मौसम बदलने के साथ ही जिन बीमारियों का रिस्क बढ़ जाता है उनमें मीजल्स की बीमारी भी एक है। यह एक संक्रामक बीमारी है और आसानी से एक-दूसरे तक फैल सकती है। इसे रूबेला (Rubella) भी कहा जाता है। मीजल्स या रूबेला की बीमारी होने पर शरीर पर कुछ ऐसे लक्षण (Symptoms of Measles)  दिखायी देते हैं जो ठंड में होने वाली समस्याओं से मिलते-जुलते हैं और इसीलिए लोग कई बार इसे मामूली मानकर समय पर इस बीमारी का इलाज समय पर नहीं करवा पाते।

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