'मणिकर्णिका' के प्रोड्यूसर काेे आया पैरालिसिस अटैक, जानें क्या है यह

बता दें कि मणिकर्णिका के प्रोड्यूसर कमल जैन को पैरालिसिस अटैक आया है। शरीर की मांसपेशियों में आई अस्थिरता को पैरालिसिस कहते हैं। इस अवस्था में शरीर की कुछ मांसपेशियां काम करना बंद कर देती हैं।

WrittenBy

Written By: Yogita Yadav | Updated : January 20, 2019 1:47 PM IST

कंगना रनौत की आने वाली फिल्म 'मणिकर्णिका: द क्वीन ऑफ झांसी' की रिलीज से 1 हफ्ते पहले ही प्रोड्यूसर कमल जैन की हालत काफी गंभीर हो गई है। इस वक्त वो हॉस्पिटल में एडमिट हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कमल को पैरालिसिस अटैक के बाद वेंटिलेटर पर रखा गया है। बता दें कि जैन ने शनिवार को ही अपनी हेल्थ कंडिशन को लेकर ट्वीट किया था, 'प्रिय दोस्तों, अस्पताल में रहने के लिए ये बिल्कुल ठीक समय नहीं है। उम्मीद है जल्दी ठीक होने की और हमारी संयुक्त सपने और कड़ी मेहनत की सफलता के लिए खुशी मनाएं। सभी को मेरी शुभकामनाएं।'

इसके साथ ही उन्होंने मैसेज में लिखा था, 'निश्चित रूप से ये अस्पताल में रहने का अच्छा समय नहीं है। इसकी वजह से मैं कड़ी मेहनत के बाद मिलने वाले फल को महसूस करने के लिए मौजूद नहीं हूं। फिल्म के आखिरी चरण के प्रमोशन में हिस्सा नहीं ले पाने के लिए मैं मणिकर्णिका की टीम, कंगना रनौत, प्रसून जी, विजयेन्द्र जी, शंकर एहसान लॉय, अंकिता, मिष्टी और सभी को याद करता हूं। पुनीत सर का विशेष धन्यवाद, हम सभी में अपना विश्वास दिखाने के लिए, आपके बिना हम यहां नहीं होते। मैं जल्द ही वापस आऊंगा, तब तक मेरी शुभकामनाएं मेरी टीम के साथ है। दोस्तों, हमने इस सपने को साकार करने के लिए 2 साल तक कड़ी मेहनत की है और 'मणिकर्णिका' को ब्लॉकबस्टर बनाने के लिए हमने इसे इस योग्य बनाया है। मुझे उम्मीद है कि हम सभी को अपने सामूहिक सपने, ईमानदारी और कड़ी मेहनत की सफलता का आनंद मिलेगा। जय हिन्द!

यह भी पढ़ें – शरीर में बढ़ती ड्राईनैस की वजह कहीं हीटर तो नहीं, जानें इसके दुष्‍प्रभाव

कमल जैन को आया है पैरालिसिस अटैक

बता दें कि मणि‍कर्णिका के प्रोड्यूसर कमल जैन को पैरालिसिस अटैक आया है। शरीर की मांसपेशियों में आई अस्थिरता को पैरालिसिस कहते हैं। इस अवस्था में शरीर की कुछ मांसपेशियां काम करना बंद कर देती हैं। पैरालिसिस या लकवा की समस्या नर्वस सिस्टम में आई शिथिलता से पैदा होती है। शरीर या उसकी मांसपेशियां सेंसरी नर्व्स और सेंट्रल नर्वस सिस्टम के बीच होने वाले संचार से नियंत्रित होती हैं।

यह भी पढ़ें - जानिए आपकी सेहत को किस तरह प्रभावित करती है नाइट शिफ्ट

इस संचार में आई किसी भी तरह की बाधा मांसपेशियों को कमजोर बनाती है, जो आगे चलकर पैरालिसिस का रूप लेता है। पैरालिसिस शरीर के किसी भी भाग में हो सकता है। यह आपके पूरे शरीर को प्रभावित कर सकता है जिसे क्वाड्रिप्लेजिया कहते हैं। इसमें हाथ-पैर काम करना बंद कर देते हैं। वहीं, पैराप्लेजिया में शरीर का निचला हिस्सा ही प्रभावित होता है।

पैरालिसिस के कारण और बचाव

पैरालिसिस के पीछे कई कारण हो सकते हैं। इनमें न्यूरोलॉजिकल, कोई ऐसी दुर्घटना जिसमें रीढ़ की हड्डी क्षतिग्रस्त हो गई हो और कुछ इंटरनल बायोलॉजिकल डिफॉर्मेशन भी शामिल हैं।

पैरालिसिस के लक्षणों इन न्यूरोलॉजिकल बीमारियों से भी हो सकते हैं

  • एमियोट्रॉफिक लेटरल सिरॉसिस - मांसपेशियों में कमजोरी या विकलांगता
  • बेल्स पॉल्सी-चेहरे की नसों में सूजन
  • सेरिब्रल पॉल्सी
  • मल्टिपल सिरॉसिस- दिमाग और रीढ़ की हड्डी में कमजोरी

इसके अलावा पैरालिसिस के लक्षणों की कई अन्य वजहें भी हो सकती हैं, जैसे रीढ़ की हड्डी में चोट, गोली या चाकू लगना, बिजली के झटके जैसी ही अन्य कोई दुर्घटना। ऐसी कई बीमारियां हैं जिनसे पैरालिसिस का खतरा बना रहता है। एचआईवी इन्फेक्शन, आर्थराइटिस, स्पॉन्डलाइटिस ऐसी ही कुछ बीमारियां हैं। विषैले पदार्थों के सेवन या विषैले जानवरों के काटने से भी पैरालिसिस का खतरा हो सकता है। वहीं, पैरालिसिस से हार्ट अटैक, ब्रेन ट्यूमर और ब्रेन हैमरेज का भी खतरा बना रहता है, जो जानलेवा साबित हो सकता है।

ऐसी किसी भी स्थिति में तुरंत चिकित्सक से परामर्श लें। अगर आपके साथ के किसी व्यक्ति को अचानक शरीर में अकड़न, बेहोशी, चलने-फिरने या बोलने में दिक्कत महसूस हो, तो उसे जल्द से जल्द मेडिकल ट्रीटमेंट मुहैया कराएं।

Add The Health Site as a Preferred Source Add The Health Site as a Preferred Source