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Written By: Pallavi Kumari | Updated : May 30, 2022 10:49 AM IST
केरल के त्रिशूर जिले में वेस्ट नाइल बुखार (west nile virus fever) के कारण रविवार को 47 वर्षीय एक व्यक्ति की मौत हो गई है।इस व्यक्ति कि मौत (Man dies in kerala of West Nile Virus) के बाद यहां का स्वास्थ्य विभाग सतर्क हो गया है और आम लोगों को इससे बच कर रहने का निर्देश दिया है और विशेष तौर से मच्छरों के प्रजनन स्थलों को बढ़ने से रोकने और इनसे बच कर रहने को कहा है। लेकिन इससे भी ज्यादा जरूरी है इस बीमारी को लेकर आम लोगों में सही जानकारी होना। तो, आइए हम आपको बताते हैं West Nile Virus क्या है? कैसे फैलता है और इसके इंसानों में दिखने वाले इसके लक्षण क्या हैं।
वेस्ट नाइल वायरस (West Nile Virus in hindi) एक मच्छर जनित आरएनए वायरस (RNA Virus) है, जो कि एक वायरल इंफेक्शन का कारण बनता है। डब्ल्यूएचओ (WHO) के अनुसार, यह फ्लैविवायरस जीनस (flavivirus genus) का सदस्य है और फ्लैविविरिडे परिवार के जापानी एन्सेफलाइटिस एंटीजेनिक कॉम्प्लेक्स से संबंधित है। इस वायरस इंफेक्शन में मच्छरों की क्यूलेक्स प्रजाति वायरस को फैलाने में एक प्रमुख वाहक के रूप में काम करती है और इंसानों को काट कर वायरस को उनके खून में मिला देती है, जिससे वे इस वायरल इंफेक्शन के शिकार हो जाते हैं।
इस वायरस ने पहली बार 1937 में युगांडा के वेस्ट नाइल (West Nile) जिले में एक महिला को बीमार किया था। 1953 में नील डेल्टा क्षेत्र में पक्षियों जैसे कि कौवे और कबूतर में इसकी पहचान की गई थी। 1999 में ये वायरस इज़राइल, ट्यूनीशिया, न्यूयॉर्क, अमेरिका में कनाडा से वेनेजुएला तक फैल गया और इस तरह ये वायरस लोगों की नजर में आया।
वेस्ट नाइल वायरस का कारण संक्रमित मच्छर (West Nile Virus Causes) है, जो तब संक्रमित हो जाते हैं जब वे संक्रमित पक्षियों को खाते हैं। फिर ये वायरल संक्रमण कुछ दिनों के लिए उनके खून में फैलाते हैं। वायरस अंततः मच्छर की लार ग्रंथियों में चला जाता है। बाद के जब वे किसी को काटते हैं तो, ये उनमें फैलने लगता है और तेजी से मंटीप्लाई करने लगता है और फिर वायरल इंफेक्शन फैलाता है।
हालांकि, यूएस सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) और डब्ल्यूएचओ के अनुसार, यह पक्षियों सहित संक्रमित जानवरों को खाने से नहीं फैलता है। बल्कि, मांस को पूरी तरह से नहीं पकाने और फिर इसे खाने से फैलता है। इसके अलावा एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में इसे फैलने की संभावना भी बेहद कम है।
80% संक्रमित लोगों में इसके लक्षण कुछ खास नजर नहीं आते हैं। बाकियों में, ये बुखार के रूप में विकसित होता हैं, जिसे वेस्ट नाइल फीवर (west nile virus fever) या गंभीर वेस्ट नाइल रोग कहा जाता है। इसके अलावा 20% मामलों में लोगों के अंदर
- बुखार
-सिरदर्द
-थकान
-शरीर में दर्द
-मतली
- शरीर में दाने
- ग्रंथियों में सूजन शामिल हैं।
-गंभीर संक्रमण होने से एन्सेफलाइटिस, मेनिन्जाइटिस, लकवा और यहां तक कि मृत्यु भी हो सकती है।
यह अनुमान लगाया गया है कि वेस्ट नाइल वायरस से संक्रमित 150 में से लगभग 1 व्यक्ति गंभीर रूप से बीमार पड़ जाता है। इस गंभीर बीमारी से उबरने में कई सप्ताह या महीने लग सकते हैं, जो कि उनके स्वास्थ्य और इम्यून सिस्टम की मजबूती पर निर्भर करता है।
प्राथमिक रूप से मच्छरों के काटने से खुद को बचाकर इस वेक्टर जनित बीमारी को रोका जा सकता है। इसके अलावा आप कुछ अन्य तरीकों से भी बच सकते हैं। जैसे कि
-ऐसे कपड़े पहने जिसमें आपको मच्छर ना काटे। कोशिश करें कि हल्के रंग के पूरी बाजू वाले कपड़े पहनें।
-घर के आस-पास मच्छरों के प्रजनन स्थलों को कम करते हैं और इसके लिए उन जगहों की खास साफ-सफाई करें जहां पानी जमा होता हो।
-पानी से भरे कंटेनरों को कवर करके रखें।
-पानी की निकासी वाली जगहों को साफ रखें और यहां डिसइंफेक्टेड डालते रहें।
-यार्ड और बगीचों की साफ-सफाई रखें।
गौरतलब है कि केरल में पिछले तीन वर्षों में वेक्टर जनित संक्रमण के कारण राज्य में होने वाली यह पहली मौत है। हालांकि, इससे पहले भी केरल में वेस्ट नाइल वायरस के मामले सामने आए हैं लेकिन यह इतना गंभीर नहीं हुआ था। इसलिए अब बारिश का मौसम आते ही इस बीमारि से बचाव की कोशिश करना ज्यादा जरूरी हो गया है।