
आशु कुमार दास
आशु कुमार दास एक अनुभवी हेल्थ कंटेंट स्पेशलिस्ट हैं। इन्हें हेल्थ कंटेंट राइटर के तौर पर काम करते हुए 6 ... Read More
Written By: Ashu Kumar Das | Published : May 5, 2026 1:00 PM IST
Image credits by: रेबीज कुत्ते के काटने से होने वाली जानलेवा बीमारी है। (AI Generated Image )
मध्य प्रदेश के ग्वालियर से एक बेहद चिंताजनक मामला सामने आया है, जिसने रेबीज के इलाज को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 36 वर्षीय राजू कुशवाहा की कुत्ते के काटने के बाद रेबीज से मौत हो गई। बताया जा रहा है कि राजू को कुछ समय पहले कुत्ते ने काट लिया था। अपनी हेल्थ के प्रति जागरूक राजू तुरंत जयारोग्य अस्पताल पहुंचे और एंटी- रेबीज वैक्सीन लगवाई। लेकिन राजू के साथ स्वास्थ्य कर्मियों ने लापरवाही दिखाते हुए उन्हें एंटी- रेबीज की बजाय टिटेनस का इंजेक्शन लगा दिया। लगभग वैक्सीन लगने के कारण कुत्ते के काटने के लगभग 20 दिन बाद, उनमें रेबीज के लक्षण दिखाई देने लगे, जैसे कि पानी से डर लगना (हाइड्रोफोबिया) और सेहत का लगातार बिगड़ना और आखिरकार रेबीज के कारण उनकी मौत हो गई।
रिपोर्ट्स की मानें तो मध्यप्रदेश के ग्वालियर में दिसंबर 2025 से अप्रैल 2026 के बीच 13,500 से अधिक कुत्ते के काटने, पंजा मारने से रेबीज के मामले सामने आए हैं। कुत्तों के कारण होने वाले रेबीज के यह आंकड़े इस समस्या की गंभीरता को दर्शाते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि कुत्ते के काटने व्यक्ति की रेबीज संक्रमण से मौत न हो इसके लिए सही समय पर घाव की सफाई और वैक्सीनेशन करवाना ही बचाव का एक मात्रा तरीका है।
कुत्ते के काटने के बाद एंटी- रेबीज वैक्सीन लेना जरूरी है।
रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र (CDC) के अनुसार, रेबीज एक वायरल संक्रमण है जो केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (central nervous system) को प्रभावित करता है और एक बार लक्षण दिखाई देने पर यह लगभग हमेशा जानलेवा ही साबित होता है। रेबीज मुख्य रूप से इंसानों में कुत्ते के काटने, खरोंच लगने, या खुले घावों के संपर्क में आने से होता है। रिपोर्ट बताती है कि भारत में, इंसानों में होने वाले रेबीज के लगभग 99 प्रतिशत केस के लिए कुत्ते ही जिम्मेदार होते हैं।
कुत्ते के काटने के बाद सबसे जरूरी होती है एंटी-रेबीज वैक्सीन। यह वैक्सीन रेबीज के घातक संक्रमण को बचाने में मदद करता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, आमतौर कुत्ते के काटने पर एंटी-रेबीज वैक्सीन (ARV) की कई डोज दी जाती है। पहली डोज कुत्ते के काटने के तुरंत बाद आता है और उसके बाद तय दिनों (जैसे Day 3, 7, 14, 28) पर लगाई जाती है। अगर घाव गहरा है या जोखिम ज्यादा है, तो रेबीज इम्युनोग्लोबुलिन (RIG) भी लगाया जाता है, जो तुरंत रेबीज संक्रमण से सुरक्षा देता है। इसके अलावा कुत्ते के काटने के बाद टिटनेस वैक्सीन भी दिया जा सकता है, ताकि टिटनेस से बचाव हो सके।
(Image credits: ChatGPT)
स्पष्ट है कि टिटनेस का इंजेक्शन रेबीज वायरस से किसी प्रकार का बचाव करने में मददगार नहीं होता है। इसलिए कुत्ते के काटने पर तुरंत सही इलाज करवाना बहुत जरूरी है।
Disclaimer: ग्वालियर की यह घटना स्वास्थ्य व्यवस्था में लापरवाही और जागरूकता की कमी को दिखाती है। रैबीज जैसी घातक बीमारी में थोड़ी सी भी देरी या गलत इलाज जानलेवा साबित हो सकता है। ऐसे में जरूरी है कि लोग कुत्ते या किसी भी जानवर के काटने के बाद तुरंत डॉक्टर से इलाज करवाया जाए।
रेबीज एक वायरस की वजह से फैलता है। यह वायरस संक्रमित जानवरों की लार में होता है।
शुरुआत में रेबीज से सामान्य संक्रमण के लक्षण जैसे बुखार, सिरदर्द और बदनदर्द जैसे लक्षण होते हैं। वहीं जब संक्रमण बढ़ जाता है, तो मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े लक्षण जैसे चिंता विकार, भ्रम रोग, पानी से डर लगना और लकवा आदि लक्षण हो सकते हैं।
रेबीज एक जानलेवा वायरल इन्फेक्शन है, जो लाइसावायरस से संक्रमित जानवर द्वारा काटने से होता है। यह आमतौर पर रीढ़ व मस्तिष्क जैसे अंगों को प्रभावित करता है।
Disclaimer: The content on TheHealthSite.com is only for informational purposes. It is not at all professional medical advice. Always consult your doctor or a healthcare specialist for any questions regarding your health or a medical condition.