
रश्मि उपाध्याय
रश्मि उपाध्याय साल 2014 से मीडिया क्षेत्र से जुड़ी हैं और TheHealthSite.Com में बतौर एडिटर काम कर रही हैं। इन्हें ... Read More
Written By: Rashmi Upadhyay | Updated : October 27, 2020 9:13 AM IST
महाराष्ट्र के पूर्व सीएम देवेंद्र फडनवीज जो कोरोना से संक्रमित हैं और उनका इलाज चल रहा है उन्होंने कांवरसेंट प्लाज्मा थेरेपी ली है। यह थेरेपी वायरल संक्रमण को रोकने में काफी कारगार मानी जाती है। उन्होंने रविवार को प्लाज्मा थेरेपी की 200ml की पहली खुराक ली और बीते सोमवार को दूसरी खुराक ली। आईसीएमआर ने कहा है कि कोविड-19 के लिए प्लाज्मा थेरेपी मानक उपचार प्रोटोकॉल से छोड़ा जा सकता है। हर किसी के दिमाग में यही सवाल आता है कि आखिर प्लाज्मा थेरेपी क्या है और यह कैसे काम करती है। तो आज हम आपको प्लाज्मा थेरेपी के बारे में विस्तार से जानकारी दे रहे हैं।
महाराष्ट्र के पूर्व सीएम देवेंद्र फडनवीज जो कोरोना से संक्रमित हैं और उनका इलाज चल रहा है उन्होंने कांवरसेंट प्लाज्मा थेरेपी ली है। यह थेरेपी वायरल संक्रमण को रोकने में काफी कारगार मानी जाती है। उन्होंने रविवार को प्लाज्मा थेरेपी की 200ml की पहली खुराक ली और बीते सोमवार को दूसरी खुराक ली। आईसीएमआर ने कहा है कि कोविड-19 के लिए प्लाज्मा थेरेपी मानक उपचार प्रोटोकॉल से छोड़ा जा सकता है। हर किसी के दिमाग में यही सवाल आता है कि आखिर प्लाज्मा थेरेपी क्या है और यह कैसे काम करती है। तो आज हम आपको प्लाज्मा थेरेपी के बारे में विस्तार से जानकारी दे रहे हैं।
गौरतलब है कि महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और भारतीय जनता पार्टी के नेता देवेंद्र फडणवीस कोरोना पॉजिटिव पाए गए थे। महामारी से संक्रमित होने का पता लगते ही उन्होंने खुद को आइसोलेट कर दिया था। फडणवीस ने ट्वीट कर इसकी जानकारी दी और कहा “मैं लॉकडाउन के समय से प्रतिदिन काम करता आ रहा हूं, लेकिन अब लगता है कि भगवान चाहते हैं कि मैं कुछ समय के लिए रुककर थोड़ा ब्रेक लूं।”
COVID 19 संक्रमण का इलाज करने के लिए कॉनवलसेंट प्लाज्मा थेरेपी एक प्रयोगात्मक प्रक्रिया है। इस उपचार पद्धति में COVID19 से पूरी तरह ठीक हो चुके रोगी के खून से प्लाज्मा को निकाल कर कोरोना वायरस से गंभीर रूप से बीमार व्यक्ति में स्थानांतरित किया जाता है।
प्लाज्मा डोनेट करना ब्लड डोनेट करने के समान है प्लाज्मा स्थानांतरित के समय ही डोनेट किया जाता है। प्लाज्मा डोनर को एक छोटे से उपकरण से जोड़ा जाता है, जो प्लाज्मा को निकाल कर रेड ब्लड सेल को उनके शरीर में वापस भेजता है। ब्लड की तुलना में प्लाज्मा को अधिक बार डोनेट किया जा सकता है। इसे सप्ताह में दो-तीन बार डोनेट किया जा सकता है।
प्लाज्मा थेरेपी एक स्वस्थ व्यक्ति से बीमार व्यक्ति में इम्यूनिटी को स्थानांतरित करके रोगियों का इलाज किया जाता है। इस थेरेपी में कोरोना वायरस से ठीक हुए मरीज से गंभीर रूप से बीमार व्यक्ति के इलाज के लिए एंटीबॉडी तत्वों का उपयोग किया जाता है। यह संक्रमित व्यक्ति को COVID 19 वायरस के खिलाफ आवश्यक एंटीबॉडी विकसित करने में मदद करता है। जब कोरोना वायरस से संक्रमित व्यक्ति में एंटीबॉडी स्थानांतरित होता है तब उसका इम्यून पावर बढ़ने लगता है। इससे कोरोना संक्रमण ठीक होने की संभावना बढ़ जाती है।
एक अध्ययन में कहा गया कि प्लाजमा थेरेपी मौत की दर को कम करने और कोविड-19 के गंभीर मरीजों के इलाज करने में कोई खास कारगर नहीं है। अध्ययन के अनुसार, कोविड-19 के लिए प्लाजमा थेरेपी के इस्तेमाल पर केवल दो परीक्षण प्रकाशित किए गए हैं, एक चीन से और दूसरा नीदरलैंड से। इसके बाद ही दोनों देशों में इसे रोक दिया गया था।