लंग कैंसर अवेयरनेस मंथ : फल-सब्जियों को डायट में शामिल करके खुद को लंग कैंसर से बचाएं

जो लोग धूम्रपान अधिक करते हैं, उनमें फेफड़े का कैंसर होने की आशंका सबसे ज्यादा रहती है। यदि आप फेफड़ों के कैंसर से बचे रहना चाहते हैं, तो इसमें आपकी मदद करेंगे फल और सब्जियां।

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Written By: Anshumala | Published : November 5, 2018 4:37 PM IST

1 नवंबर से 30 नवंबर को ''लंग कैंसर अवेयरनेस मंथ'' के तौर पर मनाया जाता है। जो लोग धूम्रपान अधिक करते हैं, उनमें फेफड़े का कैंसर होने की आशंका सबसे ज्यादा रहती है। यदि आप फेफड़ों के कैंसर से बचे रहना चाहते हैं, तो इसमें आपकी मदद करेंगे फल और सब्जियां। दरअसल, एक अध्ययन में कहा गया है कि आप अपने खानपान में जितना अधिक फल और सब्जियों को शामिल करेंगे, उतना ही आप लंग कैंसर से खुद को बचा सकते हैं।

नीदरलैंड स्थित इंस्टीट्यूट फॉर पब्लिक हेल्थ एंड इन्वायरमेंट में हुए एक अध्ययन के अनुसार, तरह-तरह के फल व सब्जियां खाने से फेफड़े के कैंसर के खतरे को कम‍ किया जा सकता है। शोध में यहां तक दावा किया गया है कि ये फल और सब्जियां धूम्रपान करने वाले व्यक्तियों के लिए भी फायदेमंद होती हैं।

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इंस्टीट्यूट फॉर पब्लिक हेल्थ एंड इन्वायरमेंट के शोधकर्ताओं के अनुसार, फेफड़े के कैंसर से बचना का सबसे कारगर तरीका यहे है कि आप स्मोकिंग छोड़ दें। स्टडी के मुख्य शोधकर्ता का कहना है कि खाने में हर तरह के फल और सब्जियां लेने से स्मोकर्स में लंग कैंसर के खतरे को एक हद तक कम किया जा सकता है। कैंसर एपिडेमायलॉजी, बायोमार्कर्स एंड प्रिवेंशन नाम के जर्नल में छपे कैंसर और न्यूट्रिशन पर आधारित स्टडी में 452,187 लोगों पर रिसर्च की गई, जिनमें से 1600 लंग कैंसर से जूझ रहे थे।

शोधकर्ताओं ने स्टडी की शुरुआत में सामान्य तौर पर खाए जाने वाले 14 कॉमन फ्रूट्स और 26 वेजिटेबल्स के बारे में सूचनाएं इकट्ठा की। स्टडी में ताजे, डिब्बाबंद और सूखे प्रोडक्ट्स भी शामिल थे। अध्ययन के पिछले परिणाम ने दिखाया कि सब्जियों और फलों की एक निश्चित मात्रा से लंग कैंसर का खतरा कम हो सकता है। खासकर, स्मोकर्स में जो स्कैवमस सेल कॉसिर्नोमा (एक प्रकार का लंग कैंसर) से पीड़ित थे।

खाने में तरह-तरह के फ्रूट्स और वेजिटेबल्स लेने से स्कैवमस सेल कॉसिर्नोमा का खतरा काफी हद तक कम हुआ। फल और सब्जियों में विविध प्रकार के बायोएक्टिव कंपाउंड होते हैं। हमें न सिर्फ निश्चित मात्रा में इनका सेवन करना चाहिए, बल्कि खाने में तरह-तरह के फल और सब्जियों को शामिल कर बायोएक्टिव उत्‍पादों का अच्‍छा खासा मेल भी होना चाहिए।

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