हिमाचल में भी फैला लंपी वायरस (Lumpy Virus), सामने आए 100 से ज्यादा मामले

Lumpy virus outbreak: लंपी वायरस के मामले भारत के कई राज्यों में बढ़ गए हैं। ऐसे में अब हिमाचल प्रदेश के जिलों में भी इस वायरस से मवेशियों के बीमार होने की खबर आ रही है।

WrittenBy

Written By: Pallavi Kumari | Published : August 8, 2022 11:58 AM IST

Lumpy virus outbreak in India: हिमाचल प्रदेश में लंपी वासरस के कारण कम से कम 40 जानवरों की मौत हो गई है और लगभग 100 से ज्यादा जानवर संक्रमित हैं, जिनमें ज्यादातर गायें हैं। दरअसल, हिमाचल के सिरमौर और सोलन सबसे ज्यादा प्रभावित जिले हैं। लेकिन अब ऊना, कांगड़ा, हमीरपुर और बिलासपुर से भी लंपी वायरस के मामले बढ़ रहे हैं। राज्य के निवासी इसलिए भी ज्यादा चिंतित हैं क्योंकि पंजाब की सीमा से लगे क्षेत्रों में इस बीमारी से 500 से ज्यादा जानवर संक्रमित है और कितनों की मौत हो गई है। अब ये ऊना जिले में फैल गया है 20 गांवों से 54 नए मामले दर्ज किए गए। साथ ही बताया जा रहा है कि जिले में संक्रमण से एक मवेशी की मौत भी हो गई है।

ऊना के 47 गांवों में 101 मवेशी बीमार

बता दें कि हिमाचल प्रदेश का जिला ऊना सबसे ज्यादा प्रभावित लग रहा है। दरअसल, ऊना पशु चिकित्सा पॉलीक्लिनिक के वरिष्ठ पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. राकेश भट्टी, का कहा कि ऊना में, 47 गांवों में 101 मवेशी लंपी वायरससे संक्रमित हैं। उन्होंने कहा कि गगरेट अनुमंडल के ततेहरा, हरोली अनुमंडल के बीतान और ऊना अनुमंडल के कोटला कलां में स्थित तीन पशु आश्रयों में लंपी वायरस से संक्रमित होने की सूचना मिली है। डॉ. भट्टी ने कहा कि आज जिस गाय की मौत हुई है, वह इलाज में देरी के कारण हुई है क्योंकि जब लक्षण पहली बार सामने आए तो किसान ने विभाग को रिपोर्ट नहीं किया।

कांगड़ा में भी बढ़े लंपी वायरस के मामले

हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा (Kangra) जिले में शनिवार तक इंदौर अनुमंडल में 12 मामले सामने आए। अनुमंडल में पहला मामला चार दिन पहले राजा खासा गांव में सामने आया था। यह जल्द ही आसपास की ग्राम पंचायतों में फैल गया। जिला पशुपालन विभाग ने जिले में सात उपकेंद्रों को राजा खासा, भालाख, भापू, ठाकुरद्वारा, चुरपुर और मिलवान ग्राम पंचायतों में इंदौरा उप-मंडल और देहरा उप-मंडल में धलियारा ग्राम पंचायत की पहचान की है। विभाग के उप निदेशक संजीव धीमान ने कहा कि पशु चिकित्सा पॉलीक्लिनिक, शाहपुर की एक टीम ने 5 अगस्त को पांच संक्रमित जानवरों के रक्त के नमूने एकत्र किए, इन्हें आईसीएआर-राष्ट्रीय उच्च सुरक्षा पशु रोग संस्थान, भोपाल, मध्य प्रदेश भेजा गया था।

मवेशियों का टीकाकरण तेज करने का निर्देश

बढ़ती बीमारी से निपटने के लिए विभाग जल्द ही टीकाकरण अभियान शुरू कर सकता है। डॉ. भट्टी ने कहा कि इस वायरस के लिए कोई विशिष्ट टीका नहीं है, लेकिन बकरियों को चेचक रोग के खिलाफ टीकाकरण के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला टीका गायों और भैंसों में काम करता है क्योंकि इसका कारक वायरस लगभग समान होता है। उन्होंने बताया कि राज्य निदेशालय से गोटपॉक्स के टीके की 10,000 शीशियां मंगवाई गई हैं। इसके अलावा संक्रमण को प्रभावी ढंग से जांचने के लिए, विभाग ने जिले में 55,000 जानवरों के लिए टीकाकरण की खुराक खरीदने का आदेश दिया है। एक बार टीके की डिलीवरी हो जाने के बाद, विशेष टीकाकरण अभियान शुरू करेगी।

इसके बाद कांगड़ा में भी विभाग हरकत में आ गया है। स्थानीय पशु चिकित्सालयों एवं औषधालयों के चिकित्सकों एवं फार्मासिस्टों को निर्देशित किया गया है कि वे नियमित रूप से प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर किसानों को जागरूक करें। साथ ही किसानों से आग्रह किया गया है कि वे घबराएं नहीं और रोग के लक्षण दिखाई देने पर गौशाला की नियमित सफाई और मवेशियों को अलग-थलग करने जैसे बचाव उपाय करें।

Add The Health Site as a Preferred Source Add The Health Site as a Preferred Source