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हफ्ते में इतनी बार मीट खाने वालों और मीट न खाने वालों को नहीं होता कैंसर का खतरा! 5 लाख लोगों पर हुए अध्ययन में सामने आई बात

हालांकि यह स्टडी डाइट और कैंसर के बीच में किसी तरह का संबंध स्थापित नहीं करती है क्योंकि इसमें प्रतिभागियों की उम्र भर की डाइट हिस्ट्री नहीं बताई गई थी।

Written by Atul Modi |Published : February 24, 2022 6:26 PM IST

बहुत सी सब्जियां जैसे ब्रोकली, पत्ता गोभी, प्याज, केल, संतरे और सेब जैसे फल कैंसर से लड़ने में मदद करते हैं, लेकिन क्या मीट भी हमें कैंसर से सुरक्षा प्रदान कर सकता है? एक स्टडी के मुताबिक हफ्ते में 5 या इससे कम बार मीट खाने से कैंसर का रिस्क कम होता है।

क्या मीट खाना कैंसर के प्रति लाभदायक है या और ज्यादा रिस्की?

ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में करीब 5 लाख लोगों पर यह स्टडी की गई। इसमें पाया गया कि जो लोग 40 से 70 उम्र की बीच के थे और जो लगातार मीट और मछली को अपनी डाइट में शामिल करते थे, उनका आने वाले 11 साल में नई-नई कैंसर विकसित होने का खतरा बढ़ गया। हालांकि यह भी देखने को मिला की जो लोग मीट हफ्ते में 5 से कम बार खाते थे उनका यह रिस्क कम था। जो लोग शाकाहारी थे उनका यह रिस्क 14% कम देखने को मिला।

जो लोग मीट को हफ्ते में 5 बार से कम खाते हैं उनका कोलोरेक्टल कैंसर होने का रिस्क 9% कम था। जो लोग मीट नहीं खाते हैं और केवल मछली खाते हैं उनका प्रोस्टेट कैंसर का खतरा 20% कम था। यह रिस्क शाकाहारी लोगों में 31% तक कम हो गया था। शाकाहारी महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर का रिस्क भी 18% तक कम था।

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हालांकि यह स्टडी डाइट और कैंसर के बीच में किसी तरह का संबंध स्थापित नहीं करती है क्योंकि इसमें प्रतिभागियों की उम्र भर की डाइट हिस्ट्री नहीं बताई गई थी।

इसमें सामने आए निष्कर्ष से यही पता चल सकता है कि मीट का सेवन हफ्ते में 5 बार से कम करना ही लाभदायक होता है। इससे अधिक खाए जाने पर अलग अलग प्रकार की कैंसर होने का रिस्क कुछ हद तक तो अवश्य ही बढ़ जाता है।

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