लॉन्ग कोविड से पीड़ित लोगों के वेगस नर्व को हो सकता है नुकसान, स्टडी का दावा

वेगस नर्व  दिल की धड़कन और बोलने की क्षमता को भी निर्धारित करती है। यह तांत्रिका मस्तिष्क से लेकर धड़ तक जाती है और दिल, फेंफड़ों तथा आंतों तक इसका विस्तार होता है।

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Written By: Sadhna Tiwari | Updated : February 14, 2022 8:35 PM IST

लॉन्ग कोविड की स्थिति से गुजर रहे लोगों में संक्रमण के चलते शरीर की वेगस तांत्रिका (vagus nerve) की कार्य करने क्षमता कमी हो सकती है। यह दावा किया गया है एक नयी स्टडी में। इस स्टडी के अनुसार, शरीर की यह महत्वपूर्ण तांत्रिका शरीर के कई प्रकार्यात्मक कार्यों को पूरा करती है। यही नहीं, वेगस नर्व  दिल की धड़कन और बोलने की क्षमता को भी निर्धारित करती है। यह तांत्रिका मस्तिष्क से लेकर धड़ तक जाती है और दिल, फेंफड़ों तथा आंतों तक इसका विस्तार होता है। वेगस नर्वस सिस्टम  भोजन करते समय निवालों को निगलने में हमारी गले की मांसपेशियों की भी क्षमता को नियंत्रित करती है। इसके साथ-साथ यह दिल की धड़कन, बोलचाल,  भोजन को आंतों तक पहुंचाने की क्रिया में आंतो की मांसपेशियों की क्षमता,पसीना बनने सहित अन्य कई महत्वपूर्ण गतिविधियों को भी नियंत्रित करती है।

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इस स्टडी को पूरा किया स्पेन की यूनिवर्सिटी अस्पताल जर्मांस ट्राएस आई पुंजोल (University Hospital Germans Trias i Pujol in Spain) के वैज्ञानिकों ने जिनके अनुसार, लॉन्ग कोविड (कोविड संक्रमण से उबरने के बाद होने वाली समस्याओं) से पीड़ित रहने से वेगस तांत्रिका की कार्यक्षमता में कमी आ जाती है और इसकी वजह से कोरोना संक्रमित लोगों में बोलने की क्षमता भी प्रभावित होती है। ऐसे लोगों को खाना निगलने में कठिनाई, सुस्ती और चक्कर आने, हार्टबीट में बदलाव होने,  लो ब्लड प्रेशर और डायरिया  जैसे कारणों की स्पष्ट व्याख्या की जा सकती है।

शोधकर्ता डा. गेम्मा लाडोस ने बताया कि हमारे निष्कर्ष लंबे समय तक कोविड संक्रमित लोगों में पाई जाने वाली अन्य व्याधियों को समझने में मदद कर सकते हैं।

उन्होंने कहा कि दीर्घकालीन अवधि तक कोविड संक्रमण संभावित रूप से कईं अंगों को निष्क्रिय करने वाला सिंड्रोम है जो अनुमानित 10-15 प्रतिशत लोगों को प्रभावित करता है। इन लक्षणों के हफ्तों से लेकर एक साल तक बने रहने की संभावना है।

टीम ने इस तांत्रिका से जुड़े लक्षणों के साथ 348 मरीजों को अवलोकन कर इमेजिंग और कार्यात्मक परीक्षणों किए । इस दौरान वेगस तंत्रिका का एक प्रायोगिक, व्यापक रूपात्मक और कार्यात्मक मूल्यांकन किया गया। लगभग 66 प्रतिशत मरीजों ने इस तांत्रिका की अक्षमता से जुड़े कम से कम एक लक्षण के 14 महीने तक बने रहने की शिकायत की।

उन्होंने कहा कि "वेगस नर्व डिसफंक्शन के लक्षणों तंत्रिका का मोटा होना, निगलने में परेशानी और हुआ सांस लेने में अनियमितता जैसे लक्षण शामिल थे।"

इस शोध के संबंध में अप्रैल में लिस्बन में होने वाले यूरोपियन कांग्रेस ऑफ क्लिनिकल माइक्रोबायोलॉजी एंड इंफेक्शियस डिजीज (ईसीसीएमआईडी 2022) में प्रायोगिक अध्ययन प्रस्तुत किया जाएगा।

(आईएएनएस)

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