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Written By: Kishori Mishra | Published : June 17, 2020 12:00 PM IST
पुरुषों की तुलना में महिलाएं फील करती है अधिक अकेलापन, शोध में हुआ खुलासा
Lockdown Loneliness : लॉकडाउन (Coronavirus lockdown) के कारण बहुत से लोगों के मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर पड़ा है। काम पर ना जाना, आर्थिक तंगी, समाज से कटाव और तमाम चिंताओं के कारण लोग मानसिक रूप से बीमार हो रहे हैं। लॉकडाउन के कारण पुरुष और महिलाओं, दोनों पर असर देखने को मिल रहा है। हाल ही में हुए अध्ययन से पता चला है कि लॉकडाउन के कारण तीन में से एक महिला अकेलेपन से (Lockdown Loneliness) पीड़ित है। एसेक्स विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्रियों द्वारा किए गए इस अध्ययन से पता चला है कि कोरोनोवायरस के बढ़ते प्रकोप के बीच महिलाओं को पुरुषों की तुलना में अधिक मानसिक परेशानियों ( Lockdown Loneliness) का सामना करना पड़ रहा है।
इस अध्ययन से पता चला है कि लॉकडाउन के कारण मानसिक परेशानी से जूझ रहे लोगों की संख्या 7 से 18 प्रतिशत बढ़ी है। विशेष रूप से महिलाओं में मानसिक स्वास्थ्य अधिक बिगड़े हैं। आंकड़ों के अनुसार, महिलाओं में लॉकडाउन के कारण मानसिक तनाव 11 से 27 प्रतिशत (women suffering from lockdown loneliness) तक बढ़ा है।
शोधकर्ताओं का इस बारे में मत है कि महिलाओं में मानसिक तनाव का कारण बच्चों और घरेलू काम दोनों के साथ-साथ ऑफिस की एक्ट्रा जिम्मेदारी संभालने के चलते बढ़ी है। अध्ययन में पाया गया है कि लॉकडाउन के दौरान 34 प्रतिशत महिलाएं अपनी फैमिली के साथ होते हुए भी अकेलापन महसूस करती हैं। जबकि 11 प्रतिशत महिलाओं ने कहा कि उन्हें अक्सर अकेलापन महसूस होता है। महिलाओं की तुलना में मात्र 23 प्रतिशत पुरुषों को लॉकडाउन में अकेलापन महसूस होता है। वहीं, 6 प्रतिशत पुरुषों ने कहा कि उन्हें कभी-कभी अकेलापन महसूस होता है। यह अध्ययन ब्रिटेन के ऑनलाइन इंटरव्यू पर आधारित है।
इस तरह के विषयों पर पहले भी अध्ययन हो चुके हैं। इन अध्ययनों से पता चलता है कि दुनियाभर में महिलाओं पर घर के काम-काज के साथ-साथ बच्चों की जिम्मेदारी और ऑफिस का तनाव अधिक होता है। साल के शुरुआत में मैकिन्से की एक रिपोर्ट आई थी। इस रिपोर्ट में कहा गया था कि महिलाएं अपनी खुद की कार्य प्रतिबद्धताओं के बावजूद घर पर अधिक जिम्मेदारियां लेती हैं।
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इससे उनके स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ता है। विश्वभर में शिक्षित और नौकरीपेशा महिलाओं की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन उनकी घरेलू जिम्मेदारियां और भागीदारी अबतक कम नहीं हुई हैं। वे अपने परिवार का ख्याल पुरुषों की तुलना में अधिक रखती हैं, इसके साथ ही उन्हे बाहर की जिम्मेदारियां भी उठानी पड़ती है।
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