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भारतीय महिलाओं में डायबिटीज की एक वजह है विटामिन डी की कमी- रिसर्च

1980 में डायबिटीज़ मरीज़ों की संख्या 108 मिलियन थी जो 2014 तक बढ़कर 422 मिलियन हो गई है।

हाल में हुए एक रिसर्च से यह साबित हुआ है कि भारतीय महिलाओं में डायबिटीज यानि मधुमेह होने में विटामिन डी की कमी एक बड़ी वजह है। फोर्टिस सी-डाॅक और एम्स, डायबिटीज़ फाउंडेशन आॅफ इंडिया एंड नेशनल डायबिटीज़, ओबेसिटी एंड कलेस्ट्राॅल फाउंडेशन द्वारा कराए एक सर्वे से यह खुलासा हुआ है कि भारतीय महिलाओं में विटामिन डी की कमी होने की संभावना काफी अधिक है। उत्तर भारत में कराए गए इस अध्ययन ने प्री-डायबिटिक स्टेज की भारतीय महिलाओं  में विटामिन डी की कमी और ब्लड ग्लूकोज़ लेवल को ज़्यादा पाया। यह पहला अवसर है जब इस प्रकार का अध्ययन भारत में किया गया है और इसे ब्रिटिश मेडिकल जर्नल ने प्रकाशित किया है। इस अध्ययन के लिए 20 से 60 साल की उम्र की 797 महिलाओं को शामिल किया गया। उन्हें काफी सावधानीपूर्वक चुना गया था और इसके लिए क्लीनिकल मूल्यांकन तथा बायो केमिकल जांच की गई।

अध्ययन के लिए महिलाओं का मूल्यांकन जिन मानकों के आधार पर किया गया वह हैं: ब्लड प्रेशर, बाॅडी मास इंडेक्स (बीएमआई), फास्टिंग ब्लड ग्लूकोज़ (एफबीजी), हाइड्रोक्सीविटामिन डी लेवल, डेमोग्राफिक और क्लीनिकल प्रोफाइल, मेडिकल हिस्ट्री (व्यक्तिगत तथा पारिवारिक), सामाजिक-आर्थिक स्थित, धूप में महिला को कितनी देर रहना पड़ता है आदि।

इस अध्ययन के नतीजे इस प्रकार रहेः

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  • महिलाओं में विटामिन डी की कमी काफी अधिक है।
  • भारत में 68फीसदी महिलाओं में विटामिन डी की कमी है।
  •  भारत में 26 फीसदी महिलाओं में विटामिन डी की मात्रा ’अपर्याप्त‘ है
  • भारत में 5 फीसदी महिलाओं में विटामिन डी की ’पर्याप्त‘ मात्रा है
  •  विटामिन डी और ब्लड शुगर के स्तर में परस्पर विरोधी संबंध है यानी कम विटामिन डी होने पर ब्लड शुगर लेवल  अधिक होने की आशंका रहती है।

यह प्रीडायबिटीज़ और विटामिन डी को लेकर दुनियाभर में सबसे बड़ा अध्ययन है और इसके नतीजो के आधार पर अनुमान लगाया जा रहा है कि संभवतः विटामिन डी का सीधा असर पैंक्रियाटिक बीटा कोशिकाओं की कार्यप्रणाली पर पड़ता है जिससे इंसुलिन का अधिक उत्पादन होता है

विटामिन डी सप्लीमेंट करने से भारत में महिलाओं में डायबिटीज़ की संभावना कम हो सकती है। विटामिन डी दूध, अंडे, सैलमन, टुना और मशरूम जैसे खाद्य पदार्थों में पाया जाता है। यह अल्ट्रा-वायलेट किरणों के शरीर पर पड़ने और सिंथेसिस की प्रक्रिया शुरू होने पर शरीर में खुद-ब-खुद पैदा होता है। यह इम्यून सिस्टम रेग्यूलेटर है और मैटाबॉलिज़्म को बढ़ाने, मस्तिष्क की कार्यप्रणाली को मजबूत करने और अस्थमा तथा आर्थराइटिस के जोखिम कम करने में मददगार है।

अध्ययन के नतीजों से संकेत मिले हैं कि कमजोर सामाजिक-आर्थिक समूहों की महिलाओं में उच्च सामाजिक-आर्थिक वर्गों की महिलाओं के मुकाबले विटामिन डी की अधिक कमी होती है। यह भी देखा गया है कि मेनोपाॅज़ के बाद जिन महिलाओं में कैल्शियम की मात्रा कम होती है और विटामिन डी की भी कमी होती है उनमें हड्डियों के क्षतिग्रस्त होने की आशंका अधिक होती है।

डाॅ. अनूप मिश्रा, चेयरमैन, फोर्टिस सी-डाॅक ने जानकारी दी, ’’पिछले अध्यनों से यह स्पष्ट हो चुका है कि विटामिन डी की कमी और बेली फैट के बीच संबंध है। साथ ही, इनसे यह बात भी सामने आयी है  कि डायबिटीज़ से पीड़ित मरीज़ों में स्वस्थ लोगों की तुलना में विटामिन डी की मात्रा कम होती है। इस प्रकार के 9 अध्ययन कराए गए हैं जिनमें महिलाओं और पुरुषों दोनों को रखा गया था। लेकिन विटामिन डी और प्री-डायबिटीज़ की स्थिति उत्पन्न होने के बीच के संबंधों पर कोई खास जानकारी उपलब्ध नहीं थी और न ही इस बारे में अधिक पता लगाने की कोशिश की गई थी। लेकिन भारत में इस बारे में और जानकारी हासिल करने की ज़रूरत है क्योंकि देश में महिलाओं में मोटापा, मेटाबोलिक सिंड्रोम और नतीजतन हाइपरग्लाइसीमिया तथा डायबिटीज़ की अधिक संभावना रहती है। जिस रफ्तार से महिलाएं प्री-डायबिटीक से डायबिटीक स्टेज की तरफ बढ़ रही हैं वह वाकई चिंताजनक है। अगर इसे किफायती विटामिन डी सप्लीमेंट से रोका जा सकता है तो यह वाकई बहुत ही लाभदायक रहेगा।‘‘

विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, डायबिटीज़ ऐसी बीमारी है जिसका पूरी तरह से इलाज नहीं किया जा सकता है। यह उस स्थिति में होता है जबकि पैंक्रियाज़ में इंसुलिन नहीं बन पाता या फिर जब शरीर इंसुलिन का सही तरीके से इस्तेमाल करने में असमर्थ रहता है। डायबिटीज़ की वजह से अंधापन, किडनी में खराबी, स्ट्रोक , ब्रेन स्ट्रोक तथा  पैरों के निचले हिस्सों में परेशानी (कई बार पैर काटना भी पड़ता है) हो सकती हैं। 1980 में डायबिटीज़ मरीज़ों की संख्या 108 मिलियन थी जो 2014 तक बढ़कर 422 मिलियन हो गई है। 2015 में, डायबिटीज़ की वजह से 1.6 मिलियन मरीज़ों की मृत्यु हुई। संतुलित आहार, नियमित शारीरिक व्यायाम, वजन कम करने और तंबाकू सेवन से बचे रहने से ही टाइप 2 डायबिटीज़ से बचा जा सकता है।

स्रोत: Press Release.

चित्रस्रोत: Shutterstock.

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