बाढ़ ग्रस्त केरल में लेप्टोस्पायरोसिस से महिला की मौत, जानें लेप्टोस्पायरोसिस के कारण, लक्षण और उपचार

लेप्टोस्पायरोसिस ''लेप्टोस्पायर'' नामक जीवाणुओं द्वारा उत्पन्न होता है, जो संक्रमित जानवरों के मूत्र में पाया जाता है। यह संक्रमण जानवरों से मनुष्य तक फैल सकता है।

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Written By: Anshumala | Published : September 3, 2018 12:11 PM IST

बाढ़ ग्रस्त केरल में रविवार को लेप्टोस्पायरोसिस से एक महिला की मौत हो गई, जिसके बाद चूहे से फैलने वाले इस बुखार से मरने वालों की संख्या 15 पहुंच गई। राज्य की स्वास्थ्य मंत्री के.के. शैलजा ने आश्वस्त किया है कि लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है।

बीते दो दिनों में जानवरों से इंसानों में फैलने वाले संक्रमण से आठ लोगों की मौत हो चुकी है। इस बीमारी के फैलने का खतरा बाढ़ के दौरान सबसे अधिक होता है।

कोझिकोड चिकित्सा कॉलेज अस्पताल के अधिकारियों के मुताबिक, महिला की मौत रविवार सुबह हुई।

राज्य में रविवार को लेप्टोस्पायरोसिस के 40 मामले दर्ज किए गए। कोझिकोड में 28 मामले सामने आए। वहीं बाकी मामले अलाप्पुझा, त्रिशूर और पथानामथिट्टा में दर्ज किए गए हैं।

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शैलजा का कहना है कि घबराने की कोई जरूरत नहीं है क्योंकि स्वास्थ्य विभाग ने सभी जरूरी कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा,"प्रत्येक अस्पताल में सभी जरूरी दवाओं का भंडार है।"

मंत्री ने बाढ़ प्रभावित इलाके के लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी है।  कोझिकोड से सबसे ज्यादा मामले सामने आने के बाद कोझिकोड चिकित्सा कॉलेज अस्पताल में एक विशेष अलग वार्ड खोला गया है।

केरल स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक, राज्य के करीब 20 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं और इसलिए सभी की देखभाल की जानी चाहिए।

leptospirosis in kerala लेप्टोस्पायरोसिस में 104 डिग्री फारेनहाइट तक बुखार होता है। © Shutterstock.

लेप्टोस्पायरोसिस होने के कारण

लेप्टोस्पायरोसिस लेप्टोस्पायर नामक जीवाणुओं द्वारा उत्पन्न होता है, जो संक्रमित जानवरों के मूत्र में पाया जाता है। यह संक्रमण जानवरों से मनुष्य तक फैल सकता है। आमतौर पर यह चूहे, गिलहरी, भैंस, घोड़े, भेंड़, बकरी, सूअर और कुत्ते द्वारा फैलता है।

लक्षण

- तेज बुखार जो 104 डिग्री फारेनहाइट तक होता है।

- सिरदर्द और ठंड लगना।

- मतली और उल्टी।

- खासतौर से पिंडली की मांसपेशियों और पीठ के निचले हिस्से में दर्द होना।

- कंजक्टिवाइटिस, आंखों में जलन होना।

गंभीर समस्याओं में शामिल

- मेनिनजाइटिस-दिमागी बुखार।

- अत्यधिक थकान।

- बहरापन।

- सांस लेने में परेशानी।

बचाव

- जूते, दस्ताने, मास्क आदि पहनें।

- वाटरप्रूफ ड्रेसिंग के साथ त्वचा के घावों को कवर करें।

- पूल, तालाबों, नदियां के पास जाने से बचें।

- दूषित पानी में जाने या तैराकी करने से बचें।

- घावों की नियमित रूप से सफाई करें।

- बीमार या मृत जानवरों को न छुएं।

- साफ पानी पिएं।

(इनपुट:आईएएनएस)

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