मैगी में मौजूद लेड आपके दिल, दिमाग और किडनी को पहुंचा सकता है नुकसान, जरा कम कर दें खाना

भारत में तय मानक के अनुसार के किसी फूड प्रोडक्ट में लेड की मात्रा 2.5 पीपीएम तक ही होनी चाहिए, लेकिन मैगी के नमूनों में इसकी मात्रा इससे काफी अधिक थी।

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Written By: Editorial Team | Published : January 4, 2019 3:24 PM IST

मैगी खाने से इंकार शायद ही कोई बच्चा करता हो। बच्चे के साथ-साथ बड़े भी इसे खाना पसंद करते हैं। वर्षों से लोगों को मैगी का स्वाद लुभा रहा है। अगर, आप भी मैगी देखते ही खाने के लिए दौड़ पड़ते हैं, तो जरा ठहर जाइए। जिस मैगी को आप और आपका बच्चा चाव से खाता है, उसमें लेड की मात्रा अधिक होने की बात सामने आई है। यह लेड आपके स्वास्थ्य पर बुरा असर कर सकता है, खासतौर पर छोटे बच्चों की सेहत पर।

वर्ष 2015 में भी देश के कई राज्यों में मैगी के सैंपल लिए गए थे, जिसमें लेड की मात्रा अधिक होने की बात सामने आई थी। सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान मैगी का निर्माण करने वाली कंपनी नेस्ले के वकीलों ने इस बात को स्वीकार किया कि मैगी में लेड की मात्रा अधिक थी। नेस्ले इंडिया ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में ये मानकर सबको चौंका दिया है कि मैगी नूडल्स में कुछ मात्रा में लेड होता है। हालांकि, नेस्ले का दावा है कि ये मानकों के अंदर ही है और इससे सेहत पर बुरा प्रभाव पड़ने की आशंका न के बराबर होता है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रवैया अपनाते हुए नेस्ले से सवाल किया है कि ‘हम लेड वाली मैगी क्यों खाएं?’ इसके बाद कोर्ट ने सरकार द्वारा नेस्ले इंडिया के खिलाफ राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (एनसीडीआरसी) में किए गए केस की कार्यवाही शुरू करने की इजाजत दे दी।

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लेड क्यों है खतरनाक

लेड यानी सीसा एक हेवी मेटल होता है, जो वातावरण में मौजूद रहता है। यह एक प्रकारा का जहरीला मेटल होता है, जो शरीर में पहुंचने पर दिमाग और दिल जैसे महत्वपूर्ण अंगों को बुरी तरह से नुकसान पहुंचा सकता है। लेड पेंट, कैन्ड फूड, पीने के पानी के सिस्टम में लगे पुराने पाइप, कॉस्मेटिक्स और बैटरियों में पाया जाता है।

क्या-क्या हो सकती हैं समस्याएं

सेहत एक्सपर्ट का कहना है कि लेड सेहत के लिए न सिर्फ खतरनाक होता है बल्कि घातक भी होता है। शरीर में जाने से किडनी तक खराब हो सकती है। नर्वस सिस्टम डैमेज हो सकता है। 6 साल से कम उम्र के बच्चों के शरीर में अगर लेड पहुंच जाए तो बच्चे का आईक्यू लेवल प्रभावित होता है। बिहेवियर इश्यू होने लगता है। उन्हें बोलने में परेशानी हो सकती है, नर्वस सिस्टम को क्षति पहुंच सकती है। साथ ही हड्डियों और मांसपेशियों की ग्रोथ में भी कमी आ सकती है।

वयस्कों की बात करें तो लेड अगर लंबे समय तक हमारे शरीर के अंदर जाए तो पुरुषों और महिलाओं में बांझपन की समस्या पैदा कर सकता है, साथ ही पाचन से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं। हाई ब्लडप्रेशर, मसल्स और ज्वॉइंट पेन भी हो सकता है। प्रेग्नेंट महिलाओं में लेड की मौजूदगी से होने वाले बच्चे के दिमाग का विकस भी प्रभावित हो सकता है।

नमूनों में लेड की मात्रा

भारत में तय मानक के अनुसार के किसी फूड प्रोडक्ट में लेड की मात्रा 2.5 पीपीएम तक ही होनी चाहिए, लेकिन मैगी के नमूनों में इसकी मात्रा इससे काफी अधिक थी। वहीं, यूएस सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल के अनुसार, खून में लेड की किसी भी मात्रा को सुरक्षित नहीं माना जा सकता, क्योंकि लेड जानलेवा भी साबित हो सकता है।

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