भारत में 27.5 करोड़ बच्चे इस खतरनाक ज़हर के साथ बिता रहे हैं जीवन, यूनिसेफ का खुलासा

संयुक्त राष्ट्र बाल कोष के मुताबिक दुनियाभर मे हर 3 में से एक बच्चे के लिए लेड यानि सीसे से उत्पन्न होने वाले जहर के साथ जीना पड़ रहा है। तो वहीं, भारतीय बच्चों पर इस खतरनाक ज़हर का प्रभाव सबसे अधिक पड़ रहा है।

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Written By: Sadhna Tiwari | Updated : August 4, 2020 5:56 PM IST

Lead Poisoning: कोरोना वायरस महामारी के बीच बच्चों की सेहत भी ख़तरे में पड़ गयी है। 10 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को कोविड-19 इंफेक्शन का ख़तरा बहुत अधिक बताया गया है। जबकि, लॉकडाउन के कारण टीकाकरण यानि वैक्सीनेशन और अन्य रूटीन हेल्थ प्रोग्राम्स बंद होने के कारण बच्चों के लिए कई अन्य बीमारियों का ख़तरा भी बढ़ गया है। इसी बीच यूनिसेफ ने एक चिंताजनक जानकारी सार्वजनिक की है। संयुक्त राष्ट्र बाल कोष के मुताबिक दुनियाभर मे हर 3 में से एक बच्चे के लिए लेड यानि सीसे से उत्पन्न होने वाले जहर के साथ जीना पड़ रहा है। तो वहीं, भारतीय बच्चों पर इस खतरनाक ज़हर का प्रभाव सबसे अधिक पड़ रहा है। (Lead Poisoning in Hindi )

दुनिया का हर तीसरा बच्चा है सीसे के ज़हर का शिकार

यूनिसेफ ने हाल ही में एक रिपोर्ट सार्वजनिक की है। इस रिपोर्ट के अनुसार, विश्वभर के लगभग तीन चौथाई बच्चों को लेड पॉयजन यानि सीसा के ज़हर का ख़तरा है। इसकी सबसे बड़ी वजह, एसिड बैटरियों के डिस्पोज़ल से जुड़ी लापरवाही बतायी जा रही है। इस रिपोर्ट के अनुसार, इस्तेमाल के बाद इन बैटरियों को नष्ट करने के मामले में जो लापरवाही बरती जा रही है। उसी की वजह से बच्चों की इतनी बड़ी संख्या के लिए लेड पॉयज़न का खतरा उत्पन्न हुआ है। यूनिसेफ ने इस बाबत देशों को चेतावनी देते हुए इस दिशा में तुरंत कार्यवाही करने की अपील की है। (Lead Poisoning effects in India)

क्या कहती है रिपोर्ट?

यह रिपोर्ट यूनिसेफ और प्योर अर्थ की रिपोर्ट–’द टॉक्सिक ट्रूथ: चिल्ड्रंस एक्सपोजर टू लेड पॉल्यूशन अंडरमाइंस ए जनरेशन ऑफ पॉटेंशियल’ के शीर्षक के साथ छापी गयी। इस रिपोर्ट के अनुसार-

  • दुनियाभर के करीब 80 करोड़ बच्चों के खून में इसकी वजह से इस जहरीला सीसा धातु का स्तर पांच माइक्रोग्राम प्रति डेसीलीटर या उससे भी ज्यादा है।
  • बच्चों के रक्त में मौजूद सीसा धातु के इस हाई लेवल के गम्भीर दुष्परिणाम हो सकते हैं। जिससे, छुटकारा पाने के लिए मेडिकल ट्रीटमेंट की ज़रूरत पड़ सकती है।
  • रक्त में इस खतरनाक धातु की उपस्थिति शुरुआती लक्षण नजर नहीं दिखते हैं और ये धातु खामोशी के साथ बच्चों के स्वास्थ्य और विकास को नुकसान पहुंचाते हैं।

एशियाई देशों में है अधिक ख़तरा

इस रिपोर्ट के अनुसार एशियाई देशों में रहने वाले बच्चों को इस खतरनाक धातु का खतरा अधिक है। रिपोर्ट में एशिया के 5 देशों को इस जहर के खतरे से सबसे ज़्यादा प्रभावित बताया। जिसमें,  बांग्लादेश (कठोगोरा), जियार्जिया, घाना, इंडोनेशिया और मैक्सिको का नाम है। इस रिपोर्ट मे कहा गया है कि, सीसा धातु में मौजूद न्यूरोटॉक्सिन बच्चों के खून में घुल जाते हैं। जिससे, बच्चों की मस्तिष्क को हानि होती है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि इस प्रकार के ब्रेन डैमेज़ का कोई इलाज नहीं है।

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