‘सीसा’ घटा रहा है भारतीय बच्‍चों की बौद्धिक क्षमता, आयुर्वेदिक दवा से भी खतरा

भारतीय लोगों के खून में सीसे के स्तर को मापने का यह सबसे बड़ा शोध है। ऑस्ट्रेलिया के मैकक्केरी विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने अपने विश्लेषण में पाया की पहले की तुलना में बच्चों में बीमारियों का खतरा बहुत बढ़ गया है।

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Written By: akhilesh dwivedi | Published : October 14, 2018 11:31 PM IST

बच्चों के खून में सीसे (लेड) की मात्रा अधिक होने से दिमाग पर हो रहा है असर। यह हाल ही में हुए एक शोध से पता चला है। ऑस्ट्रेलिया में हुए एक ताजा शोध में यह पाया गया कि भारतीय बच्चों के खून में बढ़ रहे सीसे की मात्रा से उनके बौद्धिक क्षमता पर बुरा असर पड़ रहा है। खून में सीसे की मात्रा अधिक होने से बच्चों में कई अन्य बीमारियों का खतरा भी बढ़ रहा है। वैज्ञानिकों के अनुसार इसकी मुख्य वजह पुरानी बैटरी का इस्तेमाल, आयुर्वेदिक दवा, आईलाइनर, नूडल्स और मसाले जैसी वस्तुएं हैं। ये सारे पदार्थ बच्चों के खून में सीसे की मात्रा बढ़ा रहे हैं।

भारतीय लोगों के खून में सीसे के स्तर को मापने का यह सबसे बड़ा शोध है। ऑस्ट्रेलिया के मैकक्केरी विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने अपने विश्लेषण में पाया की पहले की तुलना में बच्चों में बीमारियों का खतरा बहुत बढ़ गया है। भारतीय बच्चों के बोद्धिक रूप से अक्षम होने के आसार बढ़ गये हैं।

बच्‍चों का दिमागी स्तर पर असर 

शोधकर्ता ब्रेट एरिक्सन ने कहा कि ''भारत में रह रहे बच्चों में बौद्धिक क्षमता पर दुष्प्रभाव बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि उनके खून में सीसे के मिश्रण का स्तर करीब सात माइक्रोग्राम प्रति डेसीलीटर है। अनुसंधानकर्ताओं ने बताया कि भारतीयों के रक्त में सीसे के उच्च स्तर में उल्लेखनीय वृद्धि के लिये बैट्री गलन क्रिया जिम्मेदार है और भारत में बैट्री रिसाइकिल की प्रक्रिया की व्यवस्था ठीक नहीं है।''

पुरानी बैटरी शहर के लोगों कर रही बीमार 

एरिक्सन के अनुसार, ‘‘भारत में काफी तादाद में लोग मोटरसाइकिल या कारें चलाते हैं और उसकी बैट्री का जीवन सिर्फ दो साल होता है। इस्तेमाल लेड बैट्रियों की संख्या काफी है, जिन्हें हर साल रिसाइकिल किया जाता है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘इन्हें प्राय: अनौपचारिक रूप से बेहद कम या नगण्य प्रदूषण नियंत्रकों के साथ रिसाइकिल किया जाता है जो समूचे शहरी इलाकों की हवा में पाया जाने वाला अहम लेड प्रदूषक सम्मिश्रण बन जाता है।’’

49 लाख के लगभग लोग हो सकते हैं शिकार 

अनुसंधान की गणना के अनुसार 2010 से 2018 के बीच खून में सीसे के स्तर को बताने वाले आंकड़े से बौद्धिक क्षमता में कमी और रोगों के लिये जिम्मेदार डिसैबिलिटी अडजस्टेड लाइफ इयर्स (डीएएलवाई) का पता चलता है। डीएएलवाई से यह पता चलता है कि खराब स्वास्थ्य, अक्षमता और असमय मृत्यु के कारण हम कितने साल गंवा बैठे। पूर्व के अध्ययनों के अनुमान के अनुसार सीसे से प्रेरित डीएएलवाई से 46 लाख लोग प्रभावित हुए और 165,000 लोगों की मौत हुई। नये अध्ययन में यह पता चला कि डीएएलवाई की संख्या बढ़कर 49 लाख हो सकती है।

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