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Written By: Atul Modi | Published : January 24, 2021 1:43 PM IST
पुरुष बांझपन का कारण बन सकता है देर रात तक स्मार्ट फोन का इस्तेमाल, वैज्ञानिकों ने किया चौंकाने वाला खुलासा
आप इस बात को स्वीकार करें या न करें, मगर ये बात 100 प्रतिशत सही है कि, हममें से ज्यादातर लोग अपने स्मार्टफोन को साथ लेकर सोते हैं। जबकि अधिकांश लोगों में लेटकर ही फोन को स्क्रॉल करने की आदत होती है। सोशल मीडिया और वेब सीरिज फोन चलाने का प्रमुख कारण बन गया है। जबकि हम जानते हैं कि, गैजेट्स की नीली रोशनी हमारी नींद को प्रभावित कर सकती है। पुरुष बांझपन (Male Infertility) और देर रात तक स्मार्ट फोन पर वक्त बिताने के संबंधों पर एक नए अध्ययन ने कुछ चौंकाने वाले खुलासे किए गए हैं।
वर्चुअल SLEEP 2020 की बैठक में साझा किए गए एक हालिया अध्ययन के अनुसार, यह पाया गया कि देर रात तक गैजेट्स का इस्तेमाल और उससे निकलने वाले नीले प्रकाश और पुरुष के शुक्रणु के बीच एक महत्वपूर्ण संबंध देखा गया है। दरअसल, अध्ययन में एक स्वस्थ पुरुष के शुक्राणुओं और प्रजनन क्षमता पर फोन विकिरण के प्रभाव का अध्ययन किया गया था।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, सामान्य आबादी में बांझपन की स्थिति 15 से 20 फीसदी है, जहां पुरुष प्रजनन क्षमता इस दर में 20 से 40 फीसदी योगदान देती है। भारत में, 23 प्रतिशत पुरुष बांझपन (Male Infertility) से पीड़ित हैं। बांझपन के पीछे के कारणों को समझने और उनका इलाज करने के लिए आंकड़ों को समय की आवश्यकता है। अध्ययन के अनुसार, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया उपकरणों के उपयोग का व्यापक प्रभाव हो सकता है।
अध्ययन के अनुसार, शाम के बाद स्मार्टफोन, टैबलेट के उपयोग से पुरुषों के शुक्राणु की गतिशीलता, शुक्राणु प्रगतिशील गतिशीलता और शुक्राणु एकाग्रता में कमी देखी गई। अध्ययन में ये भी पाया गया कि इन उपकरणों से निकलने वाली शॉर्ट-वेवलेंथ लाइट के संपर्क में इंसान जितना अधिक होता है, उतना ही अपरिपक्व शुक्राणु का प्रतिशत होता था। इसके अलावा, अध्ययन में पाया गया कि नींद की अवधि कुल शुक्राणुओं की संख्या और संपूर्ण प्रगतिशील गतिशीलता के साथ संबंधित है।
सरल शब्दों में कहें तो, इन उपकरणों से निकलने वाली रोशनी नींद को बाधित कर सकती है और शुक्राणुओं को उनके गंतव्य तक पहुंचने से रोक सकती है, जिससे पुरुष बांझपन की दर में वृद्धि हो सकती है।
दरअसल, स्मार्टफोन के अत्यधिक उपयोग ने हमें निर्भर बना दिया है। विकिरण व्यक्ति के डीएनए (DNA) को नुकसान पहुंचा सकता है, जिसके कारण कोशिकाएं अपने आप ठीक होने की क्षमता खोने लगती हैं। शुक्राणु या अंडा कोशिका तक पहुंचने पर ये विकिरण गर्भपात का कारण भी बन सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि, ऐसा नहीं है कि किसी को गैजेट्स का इस्तेमाल पूरी तरह से बंद कर देना चाहिए, लेकिन सोने से पहले उन्हें इसका इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।