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Written By: Jitendra Gupta | Published : June 22, 2022 2:15 PM IST
एंटीबायोटिक के ज्यादा इस्तेमाल से टाइफाइड बुखार हुआ दवा प्रतिरोधी! साल में 1 करोड़ से ज्यादा आते हैं मामले
द लांसेट माइक्रोब जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन के मुताबिक, टाइफाइड बुखार का कारण बनने वाला बैक्टीरिया अब लोगों द्वारा एंटीबायोटिक के ज्यादा इस्तेमाल करने की वजह से अधिक प्रतिरोधी हो गया है। अमेरिका की स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी सहित कई अंतर्राष्ट्रीय शोधकर्ताओं की एक टीम ने इस अध्ययन में पाया है कि बीते 30 वर्षों में भारत जैसे देशों में कुछ स्ट्रेन बहुत तेजी से बढ़े हैं, जो कुछ हद तक दवा के प्रतिरोधी हो चुके हैं।
दूषित पानी और खाने के कारण फैलने वाला टाइफाइड बुखारहर साल करीब 1 करोड़ से ज्यादा लोगों को अपना शिकार बनाता है और सालाना एक लाख लोग इस बुखार की वजह से अपनी जान गंवाते हैं। बता दें कि दक्षिण एशिया में ही करीब 70 फीसदी रोगी सामने आते हैं।
टाइफाइड इंफेक्शन को ठीक करने के लिए एंटीबायोटिक का इस्तेमाल किया जाता है लेकिन सैल्मोनेला टाइफी (S. Typhi) नाम के बैक्टीरिया का स्ट्रेन आपात स्थिति में ली जाने वाली दवा की प्रभाविकता को खतरा पहुंचा रहा है।
शोधकर्ताओं ने भारत, बांग्लादेश, नेपाल और पाकिस्तान से 2014 से लेकर 2019 के बीच टाइफाइड रोगियों से करीब 3489 सैल्मोनेला टाइफी सैंपल की जीनोम स्क्विेसिंग कराई। इसके अलावा उन्होंने 1905 से 2018 के बीच करीब 70 से ज्यादा देशों से अलग से सैल्मोनेला टाइफी के 4169 सैंपल के भी स्क्विेसिंग डेटा का भी विश्लेषण किया।
उन्होंने पाया कि लगभलग सभी दवा प्रतिरोधी स्ट्रेन दक्षिण एशिया से ही सामने आए हैं और 1990 से अन्य देशों में फैल चुके हैं और करीब 200 मामले सामने आ चुके हैं।
अध्ययन के मुख्य लेखक और स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता जेसन एंड्रयूज का कहना है कि बहुत तेजी से फैलने वाले प्रतिरोधी स्ट्रेन S. Typhi की गति बहुत तेजी से बढी है और पिछले कुछ वर्षों से चिंता का विषय बनी हुई है। इसलिए जिन देशों में बहुत ज्यादा खतरा है वहां पर विशेष रूप से एहतियाती उपाय अपनाने की तत्काल जरूरत है।
उन्होंने कहा कि इसी दौरान S. Typhi का प्रतिरोधी स्ट्रेन अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर फैल चुका है और बहुत बार टाइफाइड को कंट्रोल करने की जरूरत को नजरअंदाज कर दिया जाता है। आमतौर पर एंटीबायोटिक का इस्तेमाल वैश्विक स्तर पर हो रहा है।