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नहीं रहीं कृष्णा राज कपूर, कार्डियाक अरेस्ट से हुई मृत्यु, जानें क्या है यह स्थिति ?

कार्डियाक अटैक में अचानक दिल की धड़कन रुक जाती है।

नहीं रहीं कृष्णा राज कपूर, कार्डियाक अरेस्ट से हुई मृत्यु, जानें क्या है यह स्थिति ?
© File Photo.

Written by Sadhna Tiwari |Updated : October 1, 2018 5:30 PM IST

बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता और निर्देशक राज कपूर की पत्नी कृष्णा कपूर का सोमवार को निधन हो गया। वह 87 वर्ष की थीं। कृष्णा राज कपूर पिछले काफी समय से बीमार चल रही थीं। मिली जानकारी के अनुसार उनकी मृत्यु की वजह कार्डियाक अरेस्ट है।

क्या है कार्डियाक अरेस्ट ?

अचानक दिल की धड़कन रुकना यानि सडन कार्डियाक अरेस्ट  हार्ट अटैक की तरह नहीं है। यह एक ऐसी जटिल समस्या है, जिसका सही समय पर इलाज नहीं कराने से ये असामयिक मौत का कारण बन सकती है। हार्ट अटैक में ब्लॉक्ड आर्टरी के कारण दिल को रक्त की आपूर्ति नहीं हो पाती है जबकि कार्डिक अरेस्ट में इलेक्ट्रिक इनबैलेंस की वजह से दिल धड़कना बंद कर देता है। दिल का सही तरह से काम ना करना अनियमित दिल की धड़कन का कारण बन सकता है, जिसमें व्यक्ति भावशून्य हो जाता है। इसमें व्यक्ति सांस नहीं ले पाता है और हांफने लगता है। इस स्थिति में आप इमरजेंसी कॉल कर सकते हैं या सीपीआर (कार्डियो पल्मोनरी रिससाइटेशन) यानि मुंह से सांस देना या छाती को थपथपाना शुरू कर सकते हैं।

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सडन कार्डियाक अरेस्ट के समय शरीर क्या कोई संकेत देता है? 

  • आमतौर पर एससीए के चेतावनी या लक्षण नहीं होते हैं। हालांकि इसके तीन मुख्य संकेत होते हैं, जिनके पहचानकर आप व्यक्ति की मदद कर सकते हैं।
  • व्यक्ति अचानक होश खो बैठता है। यही कारण है कि पीड़ित अचानक गिर पड़ता है। कंधों को थपथपाने पर भी मरीज कोई प्रतिक्रिया नहीं देता है।
  • व्यक्ति नॉर्मल तरीके से सांस नहीं ले पाता है और दिल अचानक तेजी से धड़कना शुरू कर देता है।
  • पल्स और ब्लड प्रेशर थम जाते हैं और शरीर व दिमाग के अन्य हिस्सों में खून की आपूर्ति नहीं हो पाती है।

कार्डियाक अरेस्ट से पीड़ित की मदद कैसे की जा सकती है?

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फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हार्ट इंस्टीट्यूट में इलेक्ट्रोफिजियोलॉजी के अडिशनल डायरेक्टर डॉक्टर अपर्णा जसवाल के अनुसार, ऐसी स्थिति में तुरंत आपातकालीन नंबर पर फोन करें या फिर सीपीआर शुरू करें। अगर सीपीआर को सही तरीके से किया जाए, तो मरीज की जान बचाई जा सकती है। इस तकनीक से मेडिकल हेल्प नहीं मिलने तक बॉडी में ब्लड और ऑक्सीजन संचारित होता रहता है। अगर आपके पास एम्ब्यूलेटरी एक्सटर्नल डीफाइब्रलेटर  डिवाइस है, तो आपके पास रोगी की जान बचाने का सबसे अच्छा मौका है।