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सुबह मोबाइल पर गुड मॉर्निंग मैसेज, दिन पर चैट और फिर रात गुड नाईट विश तक अगर आप भी मोबाइल फोन पर चिपके रहते हैं तो यह आपके लिए कई समस्याएं खड़ी कर सकता है। दिन का पहला घंटा, यानी बिस्तर पर आंख खोलने से लेकर एक घंटे तक का समय आपको दिन भर के लिए एनर्जी देता है। जबकि मोबाइल के साथ आंख खोलकर आप उसे बहुमूल्य एक घंटे को बर्बाद कर देते हैं।
सुबह के समय कॉर्टिसोल हार्मोन यानी तनाव देने वाले हार्मोन का स्तर कम होता है। इसलिए आप सुबह उठकर फ्रेश फील करते हैं। लेकिन जब आप सुबह उठते ही मोबाइल पर आंख खोलते हैं तो कई तहर का अनावश्यक तनाव उसके साथ आ जाता है। जो शरीर और मस्तिष्क की सामान्य प्रक्रिया को बाधित करता है।
लगातार आ रहे सिर दर्द और गर्दन दर्द के आंकड़ों में सबसे कॉमन वजह गैजेट्स का ज्यादा इस्तेमाल है। युवा गैजेट्स का इस्तेमाल जरूरत से ज्यादा करते हैं और लंबे समय तक एक ही पोजीशन में बैठकर काम करते हैं, उन्हें 'रिपिटेटिव इंजरी' होने की आशंका बढ़ जाती है। 20 से 40 साल की उम्र वाले प्रोफेशनल्स के बीच रीढ़ से जुड़ी समस्याएं अधिक देखी जा रही हैं। रिपिटेटिव इंजरी स्ट्रेस इन्जरी (आरएसआई) को बार-बार एक ही प्रकार की गतिशीलता और ओवर-यूज की वजह से मसल्स और वेन्स का कारण बनता है। इस प्रॉब्लम को ओवरयूज सिंड्रोम, वर्क रिलेटेड अपर लिंब डिसॉर्डर के रूप में भी जाना जाता है।
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लंबे समय तक गैजेट्स का इस्तेमाल रीढ़ की हड्डी पर प्रेशर डालता है। इससे लिगामेंट में स्प्रेन का खतरा बढ़ जाता है जो वर्टिब्रा को बांधकर रखता है। ऐसे में मसल्स हार्ड होने लगता है और डिस्क में प्रॉब्लम होने का खतरा बढ़ जाता है। ज्यादातर लोग 40 साल से कम उम्र के हैं लेकिन उन्हें स्पाइन की गंभीर समस्या हो चुकी है और इनमें रिपिटेटिव स्ट्रेस इन्जरी सबसे ज्यादा आम है।
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