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Written By: Yogita Yadav | Published : November 29, 2018 6:42 PM IST
Image credits by: बच्चों में हड़बड़ाहट की असल वजह सेक्स के बारे में अधपकी जानकारी वाली सामग्री का आसानी से उपलब्ध होना है। ये जानकारी इंटरनेट, मीडिया, टीवी और फोन के माध्यम से हर बच्चे के पास आसानी से उपलब्ध है! ©Shutterstock
हाल ही में हुए एक अमेरिकी शोध में यह खुलासा हुआ है कि लड़कों की भी सेक्शुअली मेच्योरिटी एज कम हुई है। अभी तक इस तरह के शोध केवल लड़कियों में विकास देखने के लिए किए गए थे। पर पहली बार यह शोध लड़कों पर किया गया। इसके कई दुष्प्रभाव देखने को मिल रहे हैं। आइए जानते हैं क्या है सेक्शुअली मेच्योरिटी एज और क्या हैं इसके दुष्प्रभाव।
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क्या है 'सेक्शुअल मेच्योरिटी'
सेक्सोलजिस्ट मानते हैं कि भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में बच्चों के 'सेक्शुअल मेच्योरिटी' की उम्र कम हुई है। सेक्शुअल मेच्योरिटी को प्यूबर्टी भी कहते है। इसका मतलब होता है यौवनावस्था के दौरान शरीर में होने वाले बदलाव।
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क्या हो सकता है कारण
बीते दिनों बच्चों के खान-पान की स्थिति में बदलाव आए हैं। बच्चों के खान-पान में सुधार हुआ है। इसकी वजह से लड़कियों में पीरियड्स, ब्रेस्ट डेवलपमेंट और बॉडी डेवलपमेंट बेहतर होता जा रहा है। यही बात लड़कों के संदर्भ में भी है। लड़कों के शरीर में उगने वाले बालों का वक्त भी पहले के मुकाबले जल्दी हो गया है।
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क्या कहता है शोध
2012 में अमरीकन अकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स डिपार्टमेंट के शोध के मुताबिक लड़कों में यौवनावस्था की उम्र पिछले रिसर्च के मुकाबले छह महीने से दो साल पहले हो गई है। ये शोध अमरीका में 4100 लड़कों पर किया गया था। अमरीकन अकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स डिपार्टमेंट ने ऐसा ही शोध 2010 में लड़कियों पर किया था। उनके शोध के मुताबिक अमरीका में लड़कियां 7 साल की उम्र में 'सेक्शुअली मेच्योर' हो रही हैं। ये शोध 1200 लड़कियों पर किया गया।
क्या है दुष्प्रभाव
क्या सेक्शुअल मेच्योरिटी की घटती उम्र के साथ बच्चों का दिमाग उतना परिपक्व हो पाता है कि वो उस अहसास को अपनी उम्र के साथ जोड़ पाएं? रिसर्च में पाया गया है कि बच्चों के साथ ऐसा नहीं हो पा रहा है। जो बच्चों में हड़बड़ाहट की असल वजह बन रही है। सेक्स के बारे में अधपकी जानकारी वाली सामग्री का आसानी से उपलब्ध होना इसकी सबसे बड़ी वजह है । ये जानकारी इंटरनेट, मीडिया, टीवी और फोन के माध्यम से हर बच्चे के पास आसानी से उपलब्ध है, लेकिन दिक्कत ये है कि इस तरह की जानकारी अपने आप में अधूरी होती है।
करने होंगे बदलाव
पैरेंटिंग की स्टाइल में हमें तब्दीली लाने की जरूरत है। आजकल ज़्यादातर मां-बाप बच्चों को नैनी के भरोसे घर पर छोड़कर चले जाते हैं। इस वजह से बच्चे क्या पढ़ते हैं, क्या टीवी पर देखते हैं, और उसके बारे में क्या सोचते हैं इसकी जानकारी माता पिता को नहीं होती।
दूसरी बात, जब बच्चे स्कूल जाते हैं तो बड़ी क्लास के बच्चों के सम्पर्क में आते हैं। उनके साथ बातचीत किस विषय पर हो रही है, उस पर भी माता-पिता की निगरानी नहीं होती। उसकी वजह से ये सभी दिक्कत होती हैं इसलिए, अभिभावकों को चाहिए कि किसी भी तरह का इंटरनेट और टीवी का इस्तेमाल माता-पिता के गाइडेंस में ही किया जाए।
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