फोर्टिस में 70 वर्षीय दो वृद्धों की सफल नी रिप्लेसमेंट सर्जरी

एक मरीज की 1987 में दुर्घटना के दौरान पहले भी ऑपरेशन हो चुका था जबकि दूसरा मरीज बीते 15 वर्षो से अत्यधिक दर्द और मुश्किल का सामना करना रहा था।

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Written By: Editorial Team | Published : August 4, 2018 9:32 AM IST

वृद्धा अवस्था में घुटने की जटिल सर्जरी अब नई तकनीकी से संभव हो गई है। जींद के 70 वर्षीय दो मरीजों की दिल्ली के शालीमार बाग स्थित फोर्टिस अस्पताल में 'फास्टट्रैक नी रिप्लेसमेंट सर्जरी' (टोटल नी रिप्लेसमेंटद्ध) की गई और दोनों मरीज सफलतापूर्वक अपनी सामान्य दिनचर्या के साथ जीवनयापन कर रहे हैं। एक मरीज की 1987 में दुर्घटना के दौरान पहले भी ऑपरेशन हो चुका था जबकि दूसरा मरीज बीते 15 वर्षो से अत्यधिक दर्द और मुश्किल का सामना करना रहा था। फोर्टिस अस्पताल के ऑथोर्पेडिक्स एवं ज्वॉइंट रिप्लेसमेंट विभाग के निदेशक अमित पंकज अग्रवाल की अगुवाई में इस सर्जरी को अंजाम दिया गया।

जींद (हरियाणा) के रहने वाले 70 वर्षीय नेहरू मलिक की 1987 में दुर्घटना हुई थी जिसमें उनका बायां घुटना गंभीर रूप से घायल हो गया था। उन्होंने इसके लिए सर्जरी भी कराई लेकिन टहलते हुए उन्हें बाएं पैर में अत्यधिक दर्द का सामना करना पड़ रहा था। जब उन्हें सर्जरी के लिए लाया गया तो वह ऑर्थराइटिस और गंभीर विकृति से पीड़ित थे।

मरीज की स्थिति का अध्ययन करने के बाद चिकित्सक अमित पंकज अग्रवाल ने टोटल नी रिप्लेसमेंट (टीकेआर) कराने की सलाह दी और मरीज के बाएं घुटने का 'फास्टट्रैक नी रिप्लेसमेंट सर्जरी' तकनीक के साथ ऑपरेशन किया। यह ऑपरेशन न सिर्फ सफल रहा बल्कि वह सर्जरी के कई महीने बाद अब सामान्य महसूस कर रहे हैं।

ऐसी ही स्थिति दूसरे मरीज 70 वर्षीय राजबीर सिंह की भी थी। उन्हें दोनों घुटनों के जोड़ में दर्द, सूजन और विकार के साथ अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उनकी भी सफल सर्जरी की गई। इन्हें सर्जरी के छठे दिन अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। सर्जरी के 10 महीने बाद अब वह अपने रोज के काम काज आसानी से पूरे करने में सक्षम हैं।

डॉ. (प्रोफेसर) अमित पंकज अग्रवाल ने कहा, " नेहरू मलिक का मामला उनकी पुरानी दुर्घटना और सर्जरियों के कारण खास तौर पर चुनौती पूर्ण और जटिल था। हमने गाइरोस्कोपिकनेविगेशन के साथ फास्ट-ट्रैक नी रिप्लेसमेंट का विकल्प चुना। राजबीर सिंह के मामले में हमने दोनों घुटनों को बदलने का विकल्प चुना जिसका मतलब था दोनों घुटनों का एक साथ प्रत्यारोपण। यह तकनीक सुधार की प्रक्रिया को तेज और बेहतर बनाती है।"

स्रोत- IANS Hindi.

चित्रस्रोत-Shutterstock.

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