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Written By: Jitendra Gupta | Published : August 23, 2022 1:18 PM IST
कोविड से ठीक हुए बच्चों को भी परेशान कर रही ये मानसिक बीमारियां! स्टडी में दावा इतने दिनों तक रहता है खतरा
ऐसा नहीं है कि कोरोनावायरस ने सिर्फ उम्रदराज लोगों के ही मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करने का काम किया है बल्कि बच्चे भी इसका शिकार हुए हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक, कोविड से ठीक हुए बच्चों में न्यूरोलॉजिक्ल और साइकेट्रिक समस्याओं का खतरा बढ़ रहा है। इन समस्याओं में शामिल हैं याददाश्त में कमी, इनसोमनिया, इस्कीमिक स्ट्रोक, नर्व डिसऑर्डर, एपीलेप्सी और दौरे। 12.5 लाख से ज्यादा मरीजों के स्वास्थ्य रिकॉर्ड को खंगालने के बाद हुए एक अध्ययन में ये पाया गया है कि संक्रमित होने के महीनों बाद भी ये लक्षण प्रभावित करते हैं।
द लांसेट साइकेट्री जर्नल में ये रिपोर्ट प्रकाशित हुई है।
अध्ययन में 185,748 बच्चों के डेटा को देखा गया था, जिसमें ये पाया गया कि उम्रदराज लोगों के मुकाबले बच्चों में कोविड के बाद होने वाली परेशानियां अलग पाई गई हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, बच्चों में कोरोनावायरस इंफेक्शनके छह महीने बाद तक मूड और एंग्जाइटी डिसऑर्डर की संभावना बहुत कम होती है।
हालांकि उनमें याददाश्त की कमी, इनसोमनिया, हेमोरेज, इस्कीमिक स्ट्रोक, नर्व, नर्व रूट, पलेक्सेस डिसऑर्डर, साइकोटिक डिसऑर्डर, एपीलेप्सी और दौरे का खतरा बड़ा हुआ पाया गया है। बड़ी उम्र के लोगों के विपरित, बच्चों में याददाश्त के कम होने का खतरा 75 दिनों में शुरू होता है और ये 491 दिनों तक बना रहता है।
अध्ययन के मुताबिक, बच्चों में व्यस्कों और बुजुर्गों के मुकबाले साइकेट्रिक खतरे का कुल जोखिम ज्यादा होता है लेकिन कुछ समस्याओं में उनका निरंतर उच्च जोखिम एक चिंता का विषय बना हुआ है। दोनों ही पीढ़ियों में, उम्रदराज लोगों के एक अच्छे खासे हिस्से, जो कि न्यूरोलॉजिकल और साइकेट्रिक समस्याओं से पीड़ित होते हैं उनमें डिमेंशिया, एपीलेप्सी और दौरे से मरने का खतरा बहुत ज्यादा होता है।
डेल्टा वेरिएंट के सामने आने के तुरंत बाद इस्कीमिक स्ट्रोक, एपीलेप्सी, दौरे, याददाश्त में कमी, इनसोमनिया और एंग्जाइटी की समस्याओं के बढ़े हुए खतरे को पाया गया है।
ब्रिटेन की ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने ये खुलासा किया कि ओमिक्रोन के मामले वेरिएंट के सामने आने से पहले तक मृत्यु दर काफी कम थी लेकिन न्यूरो और साइकेट्रिक के खतरे के परिणाम जस के तस बने रहे।
शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि डेल्टा और ओमिक्रोन के दौरान न्यूरोलॉजिक्ल और साइकेट्रिक परिणाम एक समान ही थे, जो ये दर्शाते हैं कि अगर कम गंभीर वेरिएंट भी सामने आते रहे तो ये बोझ स्वास्थ्य क्षेत्र पर फिर भी बना रहेगा।