
... Read More
Written By: Anshumala | Published : September 27, 2018 11:15 PM IST
जो बच्चे रोजाना टीवी, कंप्यूटर या स्मार्टफोन की स्क्रीन से औसतन साढ़े तीन घंटे तक चिपके रहते हैं, उनमें मोटापे की समस्या बढ़ सकती है। © Shutterstock
अक्सर बच्चों को टीवी देखने या मोबाइल पर गेम खेलने के लिए दे दिया जाए, तो वे बिना समय देखे देर तक टीवी देखते रहते हैं या फिर मोबाइल पर गेम खेलने में डेबू रहते हैं। यदि आपका बच्चा भी ऐसा ही करता है, तो सतर्क हो जाएं। अमेरिका स्थित सीएचईओ यूनिवर्सिटी में हुए एक अध्ययन में यह बात सामने आई है कि जो बच्चे देर तक कंप्यूटर, टीवी, स्मार्टफोन पर दो घंटे से ज्यादा समय गुजारते हैं, वे बुद्धु हो सकते हैं। ‘द लैंसेट चाइल्ड एंड एडोलेसेंट हेल्थ जर्नल’ के हालिया अंक में इस अध्ययन के नतीजे प्रकाशित किए गए हैं। (इसे भी पढ़ें- जापान में रहते हैं सबसे खुशहाल बच्चे, जानें वजह)
इस बात को साबित करने के लिए शोधकर्ताओं ने 8 से 11 साल के 4,500 बच्चों की दिनचर्या पर पैनी नजर रखी। टीवी स्क्रीन हो या मोबाइल, इन पर बिताए जाने वाले समय के साथ-साथ उनकी नींद की गुणवत्ता और शारीरिक सक्रियता का स्तर भी शोधकर्ताओं ने जांचा। परिणाम चौंकाने वाला था। जो बच्चे प्रतिदिन दो घंटे से ज्यादा समय तक टीवी, कंप्यूटर या स्मार्टफोन की स्क्रीन से चिपके रहे, उन बच्चों की बौद्धिक और तार्किक क्षमता 5 फीसदी कम पाई गई। इतना ही नहीं, ऐसे बच्चों में एकाग्रता और याददाश्त संबंधी दिक्कतें भी देखी गईं। ऐसे बच्चों में वजन बढ़ने की समस्या भी देखी गई।
इसे भी पढ़ें- बच्चों में 5 से 12 वर्ष की आयु में प्रोटीन की आवश्यकता होती है दोगुनी, यूं करें उनकी डायट में प्रोटीन शामिल
अध्ययन के मुख्य शोधकर्ता डॉक्टर जेरेमी वॉल्श का कहना है कि टीवी, इंटरनेट, सोशल मीडिया और वीडियो गेम्स की लत बच्चों में न सिर्फ शारीरिक असक्रियता, बल्कि अनिद्रा का भी बड़ा कारण बन रहा है। इससे बच्चे मोटापे के शिकार हो रहे हैं। उनके मस्तिष्क का विकास भी सही तरीके से नहीं हो रहा है। किसी भी सूचना को ग्रहण और सही तरीके से विश्लेषण करके, उसके निष्कर्ष पर पहुंचने में भी उन्हें समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
किताबें पढ़ने की आदत करें विकसित
अध्ययन में यह भी कहा गया है कि जो बच्चे पढ़ने-लिखने की आदत विकसित करते हैं, उनकी दिमागी कौशल जल्दी बढ़ती है। दरअसल, किताबें पढ़ते समय मस्तिष्क उतना ही सक्रिय हो जाता है, जितना व्यायाम या अन्य शारीरिक गतिविधियों के दौरान होता है। इससे तंत्रिका तंत्र में नई कोशिकाओं के विकास को बढ़ावा मिलता है, जो यादें संजोने, तर्क शक्ति बनाए रखने और एक साथ कई काम करने की क्षमता प्रदान करने के लिए अहम है। शोधकर्ताओं ने बच्चों को बाहर खेलने-कूदने, नियमित रूप से व्यायाम करने और रात में कम से कम आठ से दस घंटे की नींद लेने के लिए प्रेरित करने की भी सलाह दी है।