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किडनी और लिवर भी डैमेज कर सकता है नकली मावा, ऐसे करें पहचान

इन दिनों बाजार में तरह-तरह की मिठाइयां उपलब्‍ध हैं। इनमें से अधिकांश के लिए मावा की जरूरत पड़ती है। पर सप्‍लाई से अधिक डिमांड के चलते कुछ लोग नकली मावा से मिठाइयां बनाकर बेचते हैं, पर यह सेहत के लिए बहुत घातक है। ©Shutterstock.

इन दिनों बाजार में तरह-तरह की मिठाइयां उपलब्‍ध हैं। इनमें से अधिकांश के लिए मावा की जरूरत पड़ती है। पर सप्‍लाई से अधिक डिमांड के चलते कुछ लोग नकली मावा से मिठाइयां बनाकर बेचते हैं, पर यह सेहत के लिए बहुत घातक है।

Written by Yogita Yadav |Published : March 20, 2019 1:59 PM IST

होली में मिठास घोलने के लिए बाजार में तरह-तर‍ह की मिठाइयां उपलब्‍ध हैं। इनमें से अधिकांश में मावा यानी खोआ का इस्‍तेमाल होता है। पर क्‍या आप जानते हैं कि कुछ लोग त्‍योहारी सीजन का लाभ उठाकर नकली मावा की सप्‍लाई करना शुरु कर देते हैं। इस नकली मावे से बनी मिठाइयां सेहत के लिए कितनी नुकसानदायक हैं।

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क्‍यों इस्‍तेमाल करते हैं नकली मावा

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गुझिया हो या बर्फी, मिठाई बनाने के लिए मावे की जरूरत पड़ती ही है। जो लोग घर पर मिठाई बनाना पसंद करते हैं, वे भी अमूमन मावा बाजार से ही खरीदते हैं। इन दिनों मावे का उत्‍पादन उतना नहीं होता, जितनी उसकी जरूरत होती है। इस बढ़ी हुई मांग को पूरा करने के लिए कुछ मुनाफाखोर नकली मावा बनाकर सप्‍लाई करना शुरू कर देते हैं।

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[caption id="attachment_656663" align="alignnone" width="655"]gujia-on-holi बढ़ी हुई मांग को पूरा करने के लिए कुछ मुनाफाखोर नकली मावा बनाकर सप्‍लाई करना शुरू कर देते हैं। ©Shutterstock.[/caption]

इन खतरनाक चीजों की भी हो सकती है मिलावट

मुनाफा कमाने और सीजन का लाभ उठाने के लिए कुछ लोग में कई खतरनाक केमिकल्‍स की मिलावट करने से भी नहीं चूकते। अमूमून मिलावटी मावा बनाने में दूध के पाउडर का इस्तेमाल होता है। इसे चिकनाई देने के लिए रिफाइंड या वेजीटेबल ऑयल का इस्‍तेमाल किया जाता है। इसके अलावा कई हानिकारक रसायन, आलू, शकरकंदी का प्रयोग भी किया जाता है।

खतरानक है सिंथेटिक दूध

सबसे ज्‍यादा खतरनाक वह सिंथेटिक दूध है जिसे हम दूध समझकर इस्‍तेमाल करते हैं। इसमें डिटर्जेट पाउडर, तरल जैल, चिकनाहट लाने के लिए रिफाइंड व मोबिल आयल तक का इस्‍तेमाल कर लिया जाता है। जबकि कुछ लोग यूरिया के घोल में पाउडर व मोबिल डालकर भी ¨सथेटिक दूध तैयार कर लेते हैं। इसमें थोड़ा असली दूध मिलाकर सोखता कागज डाला जाता है। फिर इसी से नकली मावा व पनीर भी तैयार किया जाता है।

[caption id="attachment_656665" align="alignnone" width="655"]mixing-mawa-hazards यदि मावा सफेद या हल्के पीले रंग का है तो वह मिलावटी हो सकता है। ©Shutterstock.[/caption]

सेहत के लिए है खतरनाक

सिंथेटिक दूध और नकली मावा, दोनों ही सेहत के लिए बहुत खतरनाक हैं। इससे सिर दर्द, उल्‍टी, दस्‍त, मितली आना तो सामान्‍य बात है पर अगर केमिकल बहुत ज्‍यादा खतरनाक हैं तो इससे पेट में संक्रमण, आंतों में संक्रमण और किडनी डेमेज होने का खतरा भी बना रहता है। ज्‍वाइंडिस होने का जोखिम भी हो सकता है।

ऐसे करें असली-नकली की पहचान

  • सबसे पहले यह जरूरी है कि आप दूध, सब्‍जी, मावा कुछ भी खरीदें, बहुत सजग होकर खरीदें। बस जरूरत भर के लिए व्‍यस्‍तता में जल्‍दी–जल्‍दी कुछ भी न खरीदते जाएं।
  • असली मावे का रंग बहुत ज्‍यादा फाइन या आकर्षक नहीं होता, इसकी वजह इसके निर्माण की पारंपरिक प्रक्रिया है।
  • यदि मावा सफेद या हल्के पीले रंग का है तो वह मिलावटी हो सकता है।
  • सूंघने पर मिलावटी मावे की खुशबू अजीब सी महसूस होती है, जबकि ओरिजिनल मावा की महक सुखद होती है।
  • लंबी प्रक्रिया के बाद तैयार मावा फैट का संपन्‍न स्रोत है। इसलिए हाथ से रगड़ने पर ओरिजिनल होने पर घी छोड़ता है इसकी महक से असली-नकली की पहचान हो जाती है।
  • चखकर देखने पर असली मावा का स्वाद अच्छा लगता है, नकली होने पर यह कड़वा या अजीब स्वाद वाला लग सकता है।
  • नकली मावा आसानी से पानी में नहीं घुलता।
  • अगर फि‍र भी लगता है कि आप इसकी पहचान नहीं कर पा रहे हैं, तो लैब में परीक्षण करवाना भी एक विकल्‍प हो सकता है।

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