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कर्नाटक सरकार पोषण की कमी से जूझ रहे बच्चों के हित में एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। गरीब रेखा से निचे या निम्न मध्यवर्गीय परिवार से आने वाले बच्चों में अक्सर पोषण की कमी देखी जाती है जिस वजह से बच्चे कुपोषित होने के साथ ही प्रोटीन की कमी से भी जूझने लगते हैं। ऐसे में कर्नाटक सरकार ने ऐलान किया है कि वो एनीमिया, कुपोषण और प्रोटीन की कमी से जूझ रहे 6 से 15 साल की उम्र के सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में पढ़ने वाले स्कूली बच्चों को उबले अंडे और केले उपलब्ध कराएगी। जो बच्चे अंडे नहीं खाते हैं उन्हें केले दिए जाएंगे जबकि जो बच्चे अंडा खाते हैं उन्हें अंडा दिया जाएगा। इस पहल की शुरुआत 1 दिसंबर 2021 से होगी जो मार्च 2022 तक जारी रहेगा।
न्यूज एजेंसी आइएनएस के अनुसार, लोक शिक्षण विभाग ने बुधवार को इस संबंध में सकरुलर जारी किया है। इस कार्यक्रम के तहत उत्तरी कर्नाटक के 6 जिलों के छात्रों को लाभ मिलेगा क्योंकि यही वो जिले हैं जहां के बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित है। इन जिलों में बीदर, रायचूर, कालाबुरागी, यादगीर, कोप्पल, बल्लारी, विजयपुर और धारवाड़ शामिल है। इन स्कूलों में पढ़ने वाले पहली से आठवीं कक्षा तक के 14,44,322 छात्रों को शामिल किया जाएगा। वहीं, यादगीर जिले में 74 प्रतिशत छात्र कुपोषण और एनीमिया से पीड़ित हैं। इस बीच, कालाबुरागी में 72.4 फीसदी, बल्लारी में 72.3 फीसदी, कोप्पल में 70.7 फीसदी, रायचूर में 70.6 फीसदी, बीदर में 69.1 फीसदी और वायापुरा में 68 फीसदी छात्र कुपोषित पाए गए।