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Jitendra Urf jeetu Da Kaise Gire: 7 नवंबर को ऋतिक रोशन की एक्स वाइफ सुजैन खान की मां जरीन खान का निधन हुआ था, जिसकी प्रार्थना सभा 11 नवंबर को रखी गई थी। इस दौरान फिल्म इंडस्ट्री से गर्लफ्रेंड सबा आजाद के साथ ऋतिक रोशन और अन्य कई कलाकार वहां पहुंचे। उन्हीं में से एक हमारे जीतू दा, यानी कि 83 साल के दिग्गज कलाकार जितेंद्र भी थे। इस दौरान जितेंद्र का प्रार्थना सभा के दौरान का एक वीडियो खूब वायरल हो रहा है।
वीडियो में दिखा जा सकता है कि, जितेंद्र चलकर आगे बढ़ रहे थे की जैसे ही उन्होंने सीढ़ी चढ़ने को अपने पैर आगे बढ़ाया तो उनके पैर सीढ़ी से टकरा गया और वह गिर गए। जीतू दा की उम्र 82 साल है, ऐसे में यह आम बात है कि 80 पार होने के बाद किसी भी बुजुर्ग व्यक्ति को बैलेंस बनाने में मुश्किल पैदा हो सकती है। ऐसा क्यों होता है? आइए विस्तार से जानते हैं।
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ द्वारा प्रकाशित एक रिपोर्ट में 80 ही नहीं बल्कि 70 साल से अधिक वयस्कों के बारे में कहा गया है कि 'उम्र से संबंधित गतिशीलता संबंधी सीमाएँ कई वृद्ध वयस्कों के जीवन का एक अभिन्न अंग हैं। अध्ययनों से पता चला है कि 70 वर्ष से अधिक आयु के लगभग 30% वयस्कों को चलने, कुर्सी से उठने या सीढ़ियां चढ़ने में परेशानी होती है। रोजमर्रा के कामों को मुश्किल बनाने के अलावा, गतिशीलता संबंधी सीमाएं गिरने, दीर्घकालिक बीमारियों, नर्सिंग होम में भर्ती होने और मृत्यु दर में वृद्धि से भी जुड़ी हैं।'
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जैसे-जैसे हमारी उम्र बढ़ती है, शरीर के काम करने की प्रक्रियाओं में भी बदलाव आते हैं। खासकर पैरों की मांसपेशियां कमजोर होने लगती हैं, जिसे सार्कोपेनिया कहा जाता है। इसके अलावा देखने की क्षमता कम हो जाती है, नर्वस सिस्टम वीक हो जाता है और दिमाग से पैरों तक जानकारी पहुंचाने की प्रक्रिया को धीमा कर देता है।
अक्सर 80 की उम्र के बाद कैल्शियम की कमी के कारणहमारी हड्डियां कमजोर होने लगती है और व्यस्क व्यक्ति को चलने में समस्या हो सकती है। इसी के साथ मांसपेशियां भी कमजोर होने लगती हैं और अक्सर बुजुर्ग व्यक्ति चलते-चलते गिर जाते हैं। यही कारण है कि जब 83 साल के जितेंद्र का हौसलों भले ही मजबूत हो लेकिन हड्डियां कमजोर होने शुरू हो गई है।
कई बुजुर्गों में देखा जाता है कि वह चलते समय छड़ी या किसी व्यक्ति का सहारा लेते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि शारीरिक कमजोरी के साथ उनके मन में गिरने का भय पैदा हो जाता है। इसलिए आपने देखा होगा कि वयस्कों को चलने के लिए कोई न कोई सहारा चाहिए होता है।
हम सभी की एक्टिव नेस दिमाग की गतिविधि पर निर्भर करती है, लेकिन 80 के बाद जिस तरह दिमाग कमजोर होने लगता है। यह शरीर के अलग-अलग अंगों तक मैसेज पहुंचाने में समय लगाना शुरु कर देता है। इसलिए जब बुजुर्ग व्यक्ति चलता है तो वह सीढ़ी या ऊंचाई आने से पहले पैर उठा देता है और बैलेंस बिगड़ने से गिर जाता है।
Disclaimer: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।
शरीर की कमजोरी दूर करने के लिए संतुलित आहार लें, पर्याप्त नींद लें, नियमित व्यायाम करें और खूब पानी पिएं।
हड्डियों की मजबूती के लिए बुढ़ापे में उम्र के अनुसार हल्के-फुल्का व्यायाम करना भी बहुत फायदेमंद है।
मायाल्जिक एन्सेफेलोमाइलाइटिस/क्रोनिक फटीग सिंड्रोम (एमई/सीएफएस) एमई/सीएफएस गंभीर थकान और थकावट है जो कम से कम छह महीने या उससे ज़्यादा समय तक रहती है।