Monkeypox Outbreak: जापान ने मंकीपॉक्स रोकने के लिए चेचक वैक्सीन के लिए दी मंजूरी, जानें मंकीपॉक्स को रोकने में कितनी कारगर है ये वैक्सीन

Monkeypox vaccine: जापान में मंकीपॉक्स से निपटने के लिए चेचक की वैक्सीन का इस्तेमाल करने को मंजूरी दे दी गई है। अब सवाल ये उठ रहा है कि क्या चेचक की वैक्सीन सचमें मंकीपॉक्स से खिलाफ सुरक्षा दे सकती है। हालांकि, वर्तमान में आए कुछ मामलों ने इसे खारिज भी किया। हालांकि, इस पर डब्ल्यूएचओ और सीडीसी ने भी अपनी राय दी है।

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Written By: Mukesh Sharma | Published : August 4, 2022 4:43 PM IST

Smallpox vaccine for Monkeypox: मंकीपॉक्स दिन-प्रतिदिन अपना विकराल रूप लेता जा रहा है, भारत में भी अब इसके फैलने का खतरा बढ़ चुका है। ताजा खबरों के मुताबिक भारत में मंकीपॉक्स से कुल 9 मामले हो चुके हैं, जिनमें से 4 मामले अकेली राजधानी दिल्ली में हैं। दुनियाभर में हेल्थ डिपार्टमेंट इस संक्रमण से निपटने के तरीके खोज रहे हैं। इसी बीज जापान ने भी मंकीपॉक्स के प्रसार से निपटने के लिए स्मॉलपॉक्स यानी चेचक के खिलाफ सुरक्षा देने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली वैक्सीन का इस्तेमाल करने की मंजूरी दे दी है। स्वास्थ्य अधिकारियों का मानना है, कि चेचक के खिलाफ सुरक्षा देने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली वैक्सीन (Smallpox vaccine) मंकीपॉक्स के खिलाफ 85 प्रतिशत तक प्रभावी है। बताते चलें कि जापान में 2 पुरुषों में मंकीपॉक्स संक्रमण पाया गया है, दोनों की उम्र 30 साल से ऊपर है और दोनों ने ही विदेश यात्रा भी की थी। मंकीपॉक्स संक्रमण के मामले मिलते ही जापान सरकार सतर्क हो गई और प्रसार को रोकने के लिए तुरंत एक्शन लेते हुए यह कदम उठाया गया। अब सवाल यह उठता है कि मंकीपॉक्स संक्रमण को रोकने के लिए चेचक की वैक्सीन कितनी प्रभावी है?

कितनी प्रभावी है चेचक की वैक्सीन

हालांकि, अभी तक इस पर रिसर्च किए जा रहे हैं और पूरी तरह से इस आंकड़े की पुष्टि नहीं की जा सकती है। लेकिन जापान समेत कई देशों के हेल्थ ऑफिशियल्स का मानना है कि चेचक के खिलाफ इस्तेमाल की जाने वाली वैक्सीन मंकीपॉक्स के प्रति 85 प्रतिशत तक प्रभावी साबित हो सकती है।

जिन्हें बचपन में लग चुकी है वैक्सीन वे कितने सुरक्षित

हाल ही में कुछ दिन पहले ऑस्ट्रिया का एक व्यक्ति मंकीपॉक्स से संक्रमित पाया गया था, जिसे बचपन में चेचक की वैक्सीन लग चुकी थी। चेचक की वैक्सीन लगने के बाद भी उस व्यक्ति को बुखार और जननांगों समेत शरीर के कई हिस्सों पर खुजलीदार चकत्ते हुए। ऐसे ही मंकीपॉक्स के कई मामले ऐसे पाए गए जिन्हें बचपन में ही स्मॉलपॉक्स का टीका लग चुका था।

सीडीसी का जवाब वैक्सीन के पक्ष में

हालांकि, लोगों के मन में यह सवाल हैं कि क्या स्मॉलपॉक्स वैक्सीन मंकीपॉक्स के खतरे को कम कर सकती है। बचपन में चेचक की वैक्सीन लेने के बाद भी मंकीपॉक्स संक्रमण होने की पुष्टि के बावजूद भी सीडीसी का यही मानना है कि चेचक की वैक्सीन मंकीपॉक्स के खतरे को कम करने में प्रभावी है। सीडीसी और डबल्यूएचओ द्वारा शेयर किए गए डाटा के अनुसार, स्मॉलपॉक्स वैक्सीन मंकीपॉक्स के खिलाफ 85 प्रतिशत प्रभावी रूप से काम कर सकती है।

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