इजरायली शोधकर्ताओं ने विकसित किया ऑटिज़्म को रोकने का उपचार

तेल वीव विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने ऐसे उपचार को विकसित किया है, जिससे ऑटिज्‍म और मानसिक मंदता से पीडि़त बच्‍चों का बेहतर उपचार किया जा सकेगा।

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Written By: Yogita Yadav | Published : November 16, 2018 2:28 PM IST

इज़रायली शोधकर्ताओं ने एक ऐसा उपचार विकसित किया है जो विकास संबंधी मंदता और ऑटिज़्म को रोक सकता है, तेल अवीव विश्वविद्यालय द्वारा प्रकाशित एक रिपोर्ट में गुरुवार को इसका खुलासा किया गया। यह भी पढ़ें - ब्रिटेन में चिकित्‍सा विशेषज्ञों ने की पशुओं पर एंटीबायोटिक्‍स पर प्रतिबंध की मांग

कैसे हुआ शोध

शोधकर्ताओं ने पाया कि पेप्टाइड एनएपी (न्यूक्लियोसोम असेंबली प्रोटीन) एडीएनपी (गतिविधि-निर्भर न्यूरोप्रोटेक्टीव प्रोटीन) के विकास को सामान्य बनाती है। प्रारंभिक थेरेपी के तौर पर यह परीक्षण चूहों पर किया गया। जबकि बच्चों में यह सिंड्रोम सबसे ज्‍यादा देखा जाता है। यह अनुवांशिक उत्परिवर्तन बच्चों में विकासशील देरी और ऑटिज़्म के प्रमुख कारणों में से एक है। यह भी पढ़ें – पीठ दर्द की वजह कहीं आपका सोने का तरीका तो नहीं ?

एडीएनपी जीन संज्ञान के विकास में एक भूमिका निभाता है। ऑटिज़्म के ज्‍यादातर मामलों में देखा गया है कि आंशिक एडीएनपी की कमी के साथ भ्रूण मानसिक मंदता से पीड़ित होते हैं।

हाल के वर्षों में, अनुवांशिक अनुक्रमिक प्रौद्योगिकी के विकास के साथ, मानसिक मंदता वाले ऑटिस्टिक बच्चों में एडीएनपी जीन में यादृच्छिक उत्परिवर्तन था, जो गर्भावस्था के दौरान होता है।

परिणामस्वरूप ऐसे मामलों में प्रोटीन सामान्य से छोटा होता है, और नतीजतन, बच्चे अपूर्ण एडीएनपी (जो एडीएनपी सिंड्रोम है) से ग्रस्त होते हैं। यह भी पढ़ें - वर्ल्‍ड डायबिटीज डे : बचपन में न घुल जाए मधुमेह की कड़वाहट

बेहतर रहे परिणाम

रिपोर्ट के मुताबिक शोधकर्ताओं ने पाया कि एडीएनपी के साथ चूहों ने स्वस्थ चूहों की तुलना में synapses (तंत्रिका कोशिकाओं के बीच लिंक बिंदु) का उत्पादन बेहतर किया है, यह प्रोटीन विशेष रूप से मस्तिष्‍क में संज्ञानात्मक गतिविधि के लिए जिम्मेदार होता है।

इन चूहों ने आत्मकेंद्रित बच्चों की ही तरह मानसिक मंदता, मस्तिष्‍क विकास में देरी, सामाजिक संवेदनशीलता में कठिनाई प्रदर्शित की।

अगले चरण में, एनएपी पेप्टाइड से प्रभावित चूहों को जन्म के क्षण से ही रोजाना इंजेक्शन दिया गया था, इसके बाद स्तनपान के दौरान नोजल स्‍प्रे भी दिया गया।

परिणाम बहुत प्रभावशाली थे: उपचारित चूहों, उन चूहों की तुलना में, जिनका उपचार नहीं किया गया था, बेहतर विकास प्रदर्शित किया। अपनी मां को बुलाने के लिए उन्‍होंने आवाजें देना, दौड़ना पहचाने और अजनबी चूहों के बीच फर्क महसूस करना शुरू किया। साथ ही मांसपेशियों में भी मजबूती हासिल की। साथ ही यह भी पता चला कि इन चूहों के दिमाग में synapses की एक उचित संख्या का उत्पादन शुरू हो गया है।

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